‘बिहार वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा’: तेजस्वी यादव का NDA सरकार पर बड़ा हमला, राजकोषीय घाटे और कर्ज को लेकर उठाए सवाल
जारी बयान में तेजस्वी यादव ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के महज कुछ महीनों के भीतर ही सरकार को सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी नियमित योजनाओं के भुगतान के लिए आकस्मिकता निधि (कंटीजेंसी फंड) का सहारा लेना पड़ रहा है। उनके अनुसार, पेंशन भुगतान के लिए हजारों करोड़ रुपये की निकासी इस बात का संकेत है कि सरकार की वित्तीय व्यवस्था दबाव में है।
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि संविधान के तहत आकस्मिकता निधि का उपयोग अप्रत्याशित और आपात स्थितियों के लिए किया जाता है, जबकि पेंशन जैसी नियमित योजनाएं वर्षों से संचालित हो रही हैं। ऐसे में इनके भुगतान के लिए आपातकालीन फंड का इस्तेमाल कई सवाल खड़े करता है।
तेजस्वी यादव ने राज्य के राजकोषीय घाटे को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार का वित्तीय घाटा निर्धारित सीमा से काफी अधिक पहुंच गया है, जो वित्तीय अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के सामने वास्तविक आर्थिक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
आकस्मिकता निधि के आकार में वृद्धि को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा। उनका कहना था कि हालिया संशोधन के बाद राज्य सरकार को बड़ी राशि तक आकस्मिकता निधि के उपयोग का अधिकार मिल गया है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे विधायिका की निगरानी कमजोर हो सकती है और वित्तीय पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।
राजद नेता ने आरोप लगाया कि सरकार आर्थिक चुनौतियों को स्वीकार करने के बजाय आंकड़ों और विज्ञप्तियों के जरिए वास्तविक स्थिति छिपाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने पूछा कि यदि सामान्य योजनाओं के संचालन के लिए भी आपातकालीन फंड का सहारा लेना पड़ रहा है, तो भविष्य की विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के कार्यों के लिए संसाधन कहां से आएंगे।
तेजस्वी यादव ने सरकार से वित्तीय स्थिति पर विस्तृत और पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि बिहार की जनता को राज्य की वास्तविक आर्थिक हालत जानने का अधिकार है। उनके इस बयान के बाद राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।







