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बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर बढ़ी सियासी हलचल, एक्टिव मोड में दिखे नीतीश कुमार

 
बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर बढ़ी सियासी हलचल, एक्टिव मोड में दिखे नीतीश कुमार
Bihar News: बिहार विधान परिषद चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। गुरुवार को मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी जदयू की राजनीति के केंद्र में बने हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार अचानक प्रदेश कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी नेताओं के साथ महत्वपूर्ण चर्चा की। इससे पहले उन्होंने सुबह उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी से भी मुलाकात की, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर तेज हो गया।

सूत्रों की मानें तो जदयू आगामी विधान परिषद चुनाव को लेकर पूरी रणनीति तैयार करने में जुट गई है। पार्टी की ओर से संभावित उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर खुद नीतीश कुमार लगाएंगे। ऐसे में उनकी लगातार बढ़ती सक्रियता को चुनावी तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

इधर निर्वाचन आयोग ने बिहार विधान परिषद की 9 सीटों तथा एक रिक्त सीट पर उपचुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया है। आयोग के अनुसार 18 जून को मतदान कराया जाएगा और उसी दिन मतगणना भी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून तय की गई है, जबकि 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी। उम्मीदवार 11 जून तक अपना नाम वापस ले सकेंगे।

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक मतदान 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। इसके बाद शाम में ही मतगणना शुरू कर दी जाएगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया 20 जून तक समाप्त कर ली जाएगी।

जिन 9 सीटों पर चुनाव होना है, वहां वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल 28 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। इनमें डॉ. कुमुद वर्मा, प्रो. गुलाम गौस, मो. फारूक, भीष्म साहनी, श्रीभगवान सिंह कुशवाहा, संजय मयूख, समीर कुमार सिंह, सम्राट चौधरी और सुनील कुमार सिंह शामिल हैं।

वहीं एक सीट पर उपचुनाव भी कराया जाएगा। यह सीट नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई थी। इस सीट पर निर्वाचित सदस्य का कार्यकाल 6 मार्च 2030 तक रहेगा।

गौरतलब है कि सम्राट चौधरी और मंत्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा ने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद 16 नवंबर 2025 को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। अब इन सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर एनडीए और महागठबंधन दोनों की नजरें टिकी हुई हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधान परिषद चुनाव भले ही प्रत्यक्ष चुनाव नहीं हो, लेकिन इसके जरिए दलों की अंदरूनी ताकत और राजनीतिक समीकरण साफ तौर पर सामने आते हैं। ऐसे में जदयू की रणनीति और नीतीश कुमार की सक्रियता आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।