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बिहार में 40 से 60 हो सकती हैं लोकसभा सीटें, नए परिसीमन ड्राफ्ट ने बढ़ाई सियासी हलचल

Bihar Politics: परिसीमन की प्रक्रिया लागू होने पर कई मौजूदा संसदीय क्षेत्रों की सीमाएं बदल सकती हैं. कुछ जिलों का पुनर्गठन कर नए लोकसभा क्षेत्र बनाए जाने की संभावना है, जिससे कई सांसदों और राजनीतिक दलों के चुनावी समीकरण भी बदल सकते हैं. खासकर सीमावर्ती और अधिक आबादी वाले जिलों में नए संसदीय क्षेत्रों के गठन की चर्चा है.
 
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Bihar Politics: बिहार में लोकसभा सीटों के संभावित परिसीमन (Delimitation) को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. नए परिसीमन ड्राफ्ट को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 40 से बढ़ाकर 60 किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. इसके तहत करीब 20 नई लोकसभा सीटें जोड़ने और कई मौजूदा संसदीय क्षेत्रों की सीमाओं में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है.

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ड्राफ्ट के मुताबिक, राज्य की 10 बड़ी लोकसभा सीटों को तीन-तीन हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव है, ताकि तेजी से बढ़ी आबादी और भौगोलिक संतुलन के आधार पर नए संसदीय क्षेत्र बनाए जा सकें. इसका उद्देश्य प्रत्येक सांसद के प्रतिनिधित्व वाले मतदाताओं की संख्या को अधिक संतुलित करना बताया जा रहा है.

इस नए फॉर्मूले के लागू होने से बिहार में लोकसभा सीटों की कुल संख्या मौजूदा 40 से बढ़कर 60 हो जाएगी, यानी सूबे में सीधे 20 सांसदों की सीटें बढ़ेंगी. संसद के आगामी मानसून सत्र में इस नए मसौदे को एक संशोधित विधेयक के रूप में सदन के पटल पर रखे जाने की संभावना है. इस गणितीय मॉडल को इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर जारी विवाद को सर्वसम्मति से सुलझाया जा सके. इसके तहत देशभर में कुल 281 नई सीटें बढ़ेंगी, जिससे देश में कुल लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 824 हो जाएगी.

आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य शमिका रवि द्वारा तैयार इस ड्राफ्ट में परिसीमन के विवादों को कम करने के लिए 7 कड़े पैमाने तय किए गए हैं. इसमें केवल आबादी को ही नहीं, बल्कि संसदीय क्षेत्र के भौगोलिक आकार, शहरी आबादी का घनत्व, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या, भाषाई विविधता और मतदान केंद्रों की संख्या को आधार बनाया गया है.

परिसीमन की प्रक्रिया लागू होने पर कई मौजूदा संसदीय क्षेत्रों की सीमाएं बदल सकती हैं. कुछ जिलों का पुनर्गठन कर नए लोकसभा क्षेत्र बनाए जाने की संभावना है, जिससे कई सांसदों और राजनीतिक दलों के चुनावी समीकरण भी बदल सकते हैं. खासकर सीमावर्ती और अधिक आबादी वाले जिलों में नए संसदीय क्षेत्रों के गठन की चर्चा है.

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फिलहाल यह प्रारंभिक ड्राफ्ट और प्रस्तावित खाका है. भारत निर्वाचन आयोग या केंद्र सरकार की ओर से अंतिम परिसीमन अधिसूचना जारी नहीं की गई है. परिसीमन आयोग की सिफारिशों और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए संसदीय क्षेत्रों और सीटों की संख्या पर अंतिम फैसला होगा.

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के वर्किंग पेपर ड्राफ्ट में बिहार के जिन 10 लोकसभा क्षेत्रों को चिह्नित किया है, उनमें पटना साहिब, पाटलिपुत्र, मुंगेर, आरा, बेगूसराय, सारण, दरभंगा, मधुबनी, झंझारपुर और महाराजगंज शामिल हैं. इन सभी 10 सीटों में से प्रत्येक को तीन अलग-अलग लोकसभा सीटों में बांटा जाएगा. इन क्षेत्रों से 10 की बजाय कुल 30 सांसद चुनकर संसद पहुंचेंगे. ड्राफ्ट की रणनीति के अनुसार, देश के 373 लोकसभा क्षेत्रों की भौगोलिक सीमा में कोई बदलाव नहीं होगा, जबकि 59 सीटों को दो हिस्सों और बिहार की इन 10 सीटों समेत देश की 111 सीटों को तीन हिस्सों में बांटने का मॉडस ऑपरेंडी तैयार किया गया है.

राजनीतिक दलों ने इस संभावित बदलाव पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिहार में लोकसभा सीटें 40 से बढ़कर 60 होती हैं, तो राज्य की राष्ट्रीय राजनीति में भागीदारी और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे. साथ ही, आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक रणनीतियों, उम्मीदवारों के चयन और जातीय-क्षेत्रीय समीकरणों पर भी इसका व्यापक असर पड़ सकता है.