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Bihar political update: 10 जनवरी को पटना आएंगे तेजस्वी यादव, खरमास बाद शुरू करेंगे राज्यव्यापी यात्रा

 
Tejashwi yadav

Bihar political update: बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल के नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की राजनीतिक सक्रियता में स्पष्ट कमी देखी गई थी। चुनाव परिणाम आने के बाद वे लंबे समय तक सार्वजनिक मंचों से दूर रहे। न तो बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी दिखी और न ही विधानसभा सत्रों में उनकी सक्रिय भागीदारी नजर आई। इस दौरान राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी होती रही कि चुनावी नतीजों से वे काफी निराश हैं और फिलहाल सियासत से थोड़ा विराम ले रहे हैं।

चुनाव के बाद करीब एक महीने तक तेजस्वी यादव बिहार से बाहर रहे। इसी दौरान क्रिसमस और न्यू ईयर के अवसर पर उनके यूरोप जाने की खबरें भी सामने आईं। हालांकि इस अवधि में उनकी ओर से किसी तरह का औपचारिक राजनीतिक बयान या गतिविधि नहीं देखने को मिली। राजद समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल उठने लगा था कि आगे पार्टी की रणनीति क्या होगी और तेजस्वी यादव कब मैदान में लौटेंगे। अब नए साल में खरमास की अवधि समाप्त होने के साथ ही तेजस्वी यादव एक बार फिर सक्रिय राजनीति में लौटने की तैयारी कर रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक वे 10 जनवरी को पटना पहुंचेंगे। उनकी यह वापसी केवल औपचारिक नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे राजद की आगे की राजनीति के लिए एक अहम पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पटना लौटते ही तेजस्वी यादव संगठनात्मक गतिविधियों में जुट जाएंगे।

पटना आने के बाद तेजस्वी यादव कुछ समय के लिए उत्तराखंड रवाना होंगे। वहां वे अपने एक करीबी सहयोगी की शादी में शामिल होंगे। यह यात्रा पूरी तरह निजी बताई जा रही है। शादी समारोह में शामिल होने के बाद वे दोबारा पटना लौट आएंगे और इसके बाद पार्टी से जुड़े अहम कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। पटना लौटने के बाद तेजस्वी यादव राजद के जिला अध्यक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाले हैं। इस बैठक में पार्टी संगठन की मौजूदा स्थिति, जमीनी स्तर पर संगठन की मजबूती और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। चुनाव में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के कारणों पर भी मंथन किया जाएगा। माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव इस बैठक के जरिए संगठन को नई दिशा देने की कोशिश करेंगे।

14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा। इसके बाद तेजस्वी यादव राज्यव्यापी यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं। यह यात्रा केवल औपचारिक दौरा नहीं होगी, बल्कि इसे राजद के लिए आत्ममंथन और पुनर्गठन की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। इस दौरान वे विभिन्न जिलों में जाकर पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं और आम जनता से संवाद करेंगे। हाल के विधानसभा चुनाव में राजद को केवल 25 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जो पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। तेजस्वी यादव की प्रस्तावित राज्यव्यापी यात्रा में इस हार के कारणों पर विशेष फोकस रहने की बात कही जा रही है। वे यह जानने की कोशिश करेंगे कि कहां संगठन कमजोर पड़ा, किन मुद्दों पर जनता का भरोसा कम हुआ और किन क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ ढीली हुई।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तेजस्वी यादव इस यात्रा के जरिए सीधे जनता से संवाद स्थापित करना चाहते हैं। वे केवल नेताओं और कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि आम लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनेंगे। इससे पार्टी की जमीनी समझ मजबूत होगी और आने वाले समय में रणनीति तय करने में मदद मिलेगी। तेजस्वी यादव की यह पहल राजद के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर निराशा का माहौल रहा है। ऐसे में नेता प्रतिपक्ष का खुद मैदान में उतरना कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर सकता है। यह यात्रा यह संकेत भी देती है कि तेजस्वी यादव अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक और सक्रिय राजनीतिक भूमिका में लौटने को तैयार हैं।

बहरहाल, खरमास के बाद शुरू होने वाली यह सियासी यात्रा बिहार की राजनीति में हलचल पैदा कर सकती है। सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी दल भी तेजस्वी यादव की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह यात्रा राजद को किस हद तक नई दिशा और मजबूती दे पाती है। 10 जनवरी को पटना वापसी और उसके बाद राज्यव्यापी यात्रा की योजना तेजस्वी यादव के राजनीतिक पुनरागमन का संकेत है। चुनावी हार के बाद यह उनकी पहली बड़ी सियासी पहल मानी जा रही है। अब देखना होगा कि यह यात्रा राजद को संगठनात्मक मजबूती देने और बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव की भूमिका को फिर से केंद्र में लाने में कितनी सफल साबित होती है।