Bihar Politics: विधानसभा चुनाव से पहले BJP का दांव, तीन बड़े चेहरे पार्टी में शामिल
Patna: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सियासी हलचल तेज़ हो गई है। मंगलवार को राजधानी पटना स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में तीन अहम चेहरों ने पार्टी की सदस्यता ली। पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा, पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि कुशवाहा और बिहार की पूर्व मंत्री सुचित्रा सिन्हा अब भाजपा के साथ खड़े हैं।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा ने इन नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई। भाजपा इसे चुनाव से पहले संगठनात्मक मजबूती और नए समीकरण साधने की रणनीति के तौर पर देख रही है।
कौन हैं आनंद मिश्रा?
पूर्व आईपीएस आनंद मिश्रा पुलिस सेवा छोड़ने के बाद राजनीति में उतरे। वे प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी में युवाओं की अगुवाई कर चुके हैं। पिछले साल बक्सर से निर्दलीय चुनाव भी लड़ा था, हालांकि सफलता नहीं मिली। मिश्रा ने सदस्यता ग्रहण करते समय कहा, भाजपा मजबूत होगी तभी बिहार मजबूत होगा। मैं टिकट का दावेदार नहीं हूं, जीवनभर पार्टी के लिए काम करूंगा। हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मिश्रा को बक्सर की किसी सीट से उतारा जा सकता है।
नागमणि कुशवाहा का दावा
पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिवंगत नेता जगदेव प्रसाद के पुत्र नागमणि कुशवाहा ने भाजपा में शामिल होते ही बड़ा बयान दिया। उनका कहना है, हम बिना शर्त बीजेपी में आए हैं। कुशवाहा समाज का 100% वोट NDA को मिलेगा। नागमणि का सियासी सफर लंबा रहा है। वे लालू यादव की RJD, नीतीश कुमार की JDU और रामविलास पासवान की LJP में रह चुके हैं। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वे मंत्री भी बने थे।
सुचित्रा सिन्हा और महिला वोट बैंक
बिहार की पूर्व मंत्री सुचित्रा सिन्हा के आने को भाजपा महिला वोटरों को साधने की रणनीति मान रही है। माना जा रहा है कि संगठन में उनकी पकड़ और नेटवर्क पार्टी के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
चुनावी समीकरण पर असर
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इन तीन चेहरों का भाजपा में शामिल होना बूथ मैनेजमेंट और जातीय समीकरण दोनों के लिहाज़ से अहम है।
• आनंद मिश्रा युवाओं और पूर्व सैनिक/पुलिस वर्ग में पकड़ रखते हैं।
• नागमणि कुशवाहा पिछड़ा वोट बैंक में प्रभाव रखते हैं।
• सुचित्रा सिन्हा महिला वोटरों को साधने में मददगार हो सकती हैं।
भाजपा के लिए यह कदम सिर्फ संगठन विस्तार नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह तय करेगा कि एनडीए का समीकरण विपक्ष पर कितना भारी पड़ता है।







