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बिहार राज्यसभा चुनाव: ‘क्लीन स्वीप’ का दावा, 5वीं सीट पर NDA की नजर और क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज

 
बिहार राज्यसभा चुनाव: ‘क्लीन स्वीप’ का दावा, 5वीं सीट पर NDA की नजर और क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज
Bihar political news: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर चुनाव की घोषणा के साथ ही सियासी पारा चढ़ गया है। सत्ताधारी एनडीए ने सभी पांचों सीटों पर जीत का दावा किया है, जबकि विपक्षी महागठबंधन अभी अपनी रणनीति को लेकर मंथन में जुटा है।

4 सीटें पक्की, 5वीं पर गणित उलझा

243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। एनडीए खेमे भाजपा, जदयू, रालोमो, लोजपा (रामविलास) और हम के पास कुल 202 विधायक हैं। ऐसे में गठबंधन चार सीटें आराम से जीत सकता है।

मगर पांचवीं सीट के लिए तीन अतिरिक्त विधायकों की दरकार होगी। यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में क्रॉस वोटिंग की संभावना और विपक्षी विधायकों के रुख को लेकर चर्चा तेज है।

कुशवाहा का दावा: ‘विपक्ष के कई विधायक संपर्क में’

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्रा कुशवाहा ने पटना में मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्यसभा की सभी पांच सीटों पर एनडीए की जीत तय है। जब उनसे पूछा गया कि 5वीं सीट के लिए संख्या बल पर्याप्त नहीं है, तो उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष के कुछ विधायक एनडीए के संपर्क में हैं।

उन्होंने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को चुनौती देते हुए कहा कि यदि महागठबंधन उम्मीदवार उतारता है तो उसकी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उनके बयान को विपक्षी खेमे में संभावित क्रॉस वोटिंग के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या कुशवाहा फिर बनेंगे राज्यसभा सांसद?

जिन पांच सीटों पर चुनाव होना है, उनमें एक सीट उपेंद्र कुशवाहा की भी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा के समर्थन से वे राज्यसभा पहुंचे थे। अब दोबारा उनकी उम्मीदवारी का फैसला एनडीए के भीतर सामूहिक सहमति से होगा। कुशवाहा ने कहा कि कौन जाएगा और कौन नहीं, यह घटक दल मिलकर तय करेंगे। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि उन्हें फिर मौका मिल सकता है।

विपक्ष की रणनीति पर नजर

महागठबंधन के पास विधानसभा में 35 विधायक हैं। यदि वह एक उम्मीदवार उतारता है, तो उसे जीत के लिए छह अतिरिक्त विधायकों की जरूरत होगी। इस संदर्भ में All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen और बसपा जैसे दलों की भूमिका अहम मानी जा रही है। AIMIM पहले ही अपना उम्मीदवार उतारने का संकेत दे चुकी है, जिससे विपक्षी समीकरण और जटिल हो सकते हैं।

अगला कदम तय करेगा तस्वीर

अगर विपक्ष उम्मीदवार नहीं उतारता, तो एनडीए का पांचों सीटों पर निर्विरोध जीतना लगभग तय है। लेकिन मुकाबला होने की स्थिति में पांचवीं सीट पर असली राजनीतिक परीक्षा होगी, जहां विधायकों की निष्ठा और रणनीति दोनों की कसौटी होगी।