बांकीपुर में BJP का ‘माइक्रो मैनेजमेंट’ प्लान, नितिन नवीन ने संभाली कमान; प्रशांत किशोर की चुनौती के बीच बूथ-बूथ पर बिछी सियासी बिसात
Bihar News: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजधानी पटना की सियासत गरमाने लगी है। प्रत्याशी बदलने के फैसले के बाद हुई राजनीतिक किरकिरी से सबक लेते हुए भाजपा ने अब इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। पार्टी की कोशिश है कि हर स्तर पर मजबूत रणनीति बनाकर चुनावी मैदान में बढ़त कायम रखी जाए। यही वजह है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन खुद चुनावी तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं और संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने में जुटे हैं।
भाजपा के सामने इस उपचुनाव में जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर की सक्रियता भी बड़ी चुनौती के रूप में देखी जा रही है। प्रशांत किशोर लगातार बांकीपुर के शहरी और जागरूक मतदाताओं के बीच जनसंपर्क कर रहे हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक क्षेत्र में लोगों से मुलाकात और संवाद के जरिए वह अपनी चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में भाजपा ने भी मुकाबले को गंभीरता से लेते हुए संगठन की पूरी ताकत मैदान में उतार दी है।
बूथ मैनेजमेंट पर भाजपा का पूरा फोकस
भाजपा की चुनावी रणनीति में सबसे अधिक जोर बूथ मैनेजमेंट पर है। पार्टी का मानना है कि चुनावी जीत के लिए बूथ स्तर पर मजबूत संगठन और मतदाताओं से सीधा संपर्क बेहद जरूरी है। इसी रणनीति के तहत बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र को करीब 60 से 65 चुनावी क्लस्टरों में बांटकर हर शक्ति केंद्र की निगरानी की जा रही है।
पार्टी ने क्षेत्र में करीब 60 शक्ति केंद्र बनाए हैं। इसके अलावा लगभग 50 विधायक और विधान परिषद सदस्यों को भी चुनावी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। स्थानीय सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नेताओं की भूमिका तय की गई है। जिस क्षेत्र में जिस समुदाय का प्रभाव अधिक है, वहां उसी समुदाय से जुड़े प्रभावशाली नेताओं को जनसंपर्क अभियान में लगाया जा रहा है।
10 मंडलों में बंटा क्षेत्र, हर स्तर पर निगरानी
चुनावी तैयारियों को व्यवस्थित करने के लिए बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र को 10 मंडलों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक मंडल में चुनाव कार्यालय के जरिए शक्ति केंद्रों और बूथों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। बूथ अध्यक्षों के साथ बीएलए-2 की भी जिम्मेदारी तय की गई है।
इन कार्यकर्ताओं के जरिए मतदाता सूची, नए मतदाताओं की स्थिति, स्थानीय मुद्दों और संभावित नाराजगी से जुड़ी जानकारी संगठन तक पहुंचाई जा रही है। पार्टी नेतृत्व को लगातार फीडबैक दिया जा रहा है, जिसके आधार पर चुनावी रणनीति में बदलाव किए जा रहे हैं।
तटस्थ वोटरों को साधने की रणनीति
भाजपा ने मतदाताओं को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर भी अपनी रणनीति तैयार की है। पार्टी के पक्के समर्थकों के अलावा भाजपा की ओर झुकाव रखने वाले, तटस्थ और विरोधी मतदाताओं को अलग-अलग वर्गों में रखा गया है। फिलहाल पार्टी का विशेष ध्यान तटस्थ मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने पर है।
इसके लिए घर-घर संपर्क अभियान चलाने के साथ ही वकील, व्यापारी, शिक्षक, छात्र, महिलाएं और नौकरीपेशा वर्ग के मतदाताओं से अलग-अलग स्तर पर संवाद की रणनीति बनाई गई है। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोजाना जनसंपर्क करने तथा स्थानीय प्रभावशाली लोगों से मुलाकात कर चुनावी माहौल का फीडबैक लेने के निर्देश दिए गए हैं।
राजद और जन सुराज भी मैदान में
वहीं, राजद प्रत्याशी रेखा कुमारी भी अपने स्तर पर चुनाव प्रचार में जुटी हैं। हालांकि, तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी के कारण फिलहाल पार्टी के प्रचार अभियान में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही है। उनके लौटने के बाद राजद के प्रचार अभियान के जोर पकड़ने की संभावना जताई जा रही है।
दूसरी ओर, प्रशांत किशोर की लगातार सक्रियता ने भाजपा की चुनावी रणनीति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। खासकर शहरी मतदाताओं के बीच जन सुराज की मौजूदगी बढ़ाने की कोशिशों पर भाजपा की नजर है।
कम मतदान प्रतिशत भी BJP के लिए चिंता
बांकीपुर में कम मतदान प्रतिशत भी भाजपा के लिए एक बड़ी चिंता है। पार्टी का प्रयास है कि उसके पारंपरिक समर्थक मतदाता किसी भी स्थिति में मतदान से दूर न रहें। इसके लिए बूथ स्तर पर मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने की रणनीति पर भी काम किया जा रहा है।
अब बांकीपुर के चुनावी रण में असली मुकाबला सिर्फ प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि भाजपा के बूथ मैनेजमेंट, प्रशांत किशोर की जनसंपर्क रणनीति और राजद के संगठनात्मक अभियान के बीच भी माना जा रहा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि नितिन नवीन की माइक्रो मैनेजमेंट रणनीति भाजपा को जीत दिला पाती है या प्रशांत किशोर और विपक्षी दलों की सक्रियता चुनावी समीकरण को नया मोड़ देती है।







