बिहार में बीजेपी का पावर-प्लान खुलकर सामने: गृह विभाग छीनने के बाद अब स्पीकर की कुर्सी पर भी कब्ज़ा, नीतीश की किसी भी ‘पलटी’ को रोकने की बड़ी रणनीति
Bihar political update: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की सियासत में नया समीकरण बन चुका है। 20 साल बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि सरकार तो जदयू के नेतृत्व में बन रही है, लेकिन असली शक्ति बीजेपी के हाथों में दिखाई दे रही है। विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी बीजेपी ने न सिर्फ गृह विभाग अपने पास रखा, बल्कि अब स्पीकर का अहम पद भी अपने खाते में ले लिया है।
बीजेपी के प्रेम कुमार बनेंगे विधानसभा अध्यक्ष
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, नौ बार के विधायक और वरिष्ठ भाजपा नेता प्रेम कुमार का बिहार विधानसभा के नए स्पीकर बनना लगभग तय है। 1 दिसंबर को एनडीए की ओर से उनके नामांकन के बाद तस्वीर साफ हो चुकी है। आज, मंगलवार को इसकी औपचारिक घोषणा मानी जा रही है। खास बात यह है कि उन्हें सर्वसम्मति से चुने जाने की पूरी संभावना है।
राजनीतिक जानकार बताते हैं कि इस फैसले के पीछे बीजेपी की रणनीति बेहद स्पष्ट है नीतीश कुमार की संभावित “पाला बदल” राजनीति पर पूरी तरह नियंत्रण। पहली बार सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद बीजेपी इस बार सत्ता की चाबी किसी भी हाल में हाथ से फिसलने नहीं देना चाहती।
स्पीकर पद क्यों है इतने बड़े राजनीतिक प्लान का हिस्सा?
संवैधानिक भूमिका
अनुच्छेद 178 के तहत विधानसभा अध्यक्ष सदन के संचालन के सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी माने जाते हैं। वे सदन की कार्यवाही से लेकर नियमों के पालन और सदस्यों के विशेषाधिकारों की रक्षा तक हर चीज़ पर अंतिम निर्णय देते हैं।
स्पीकर ही तय करते हैं कि किसे विपक्ष का नेता माना जाएगा, और जरूरत पड़ने पर सदन की गोपनीय बैठक बुलाने की भी शक्ति उन्हीं के पास होती है।
दलबदल कानून: वह शक्ति जो खेल बदल देती है
गठबंधन सरकारों में स्पीकर की शक्ति और भी बढ़ जाती है। दलबदल कानून (1985) के तहत किसी विधायक को अयोग्य ठहराने का अधिकार सिर्फ स्पीकर के पास होता है। यही वजह है कि अस्थिर राजनीतिक माहौल में यह पद “किंगमेकर” की भूमिका में आ जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी 2021 में माना था कि स्पीकर के दलबदल संबंधी फैसलों में कोर्ट की भूमिका बेहद सीमित है और उनकी प्रक्रिया की समयसीमा तय नहीं की जा सकती।
यानी यदि कभी राजनीतिक संकट खड़ा होता है, तो अंतिम फैसला स्पीकर का ही चलेगा।
नीतीश कुमार की ‘पलटी’ राजनीति से सावधान बीजेपी
चुनाव के नतीजों के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, उनसे साफ है कि यदि नीतीश कुमार चाहें तो वे महागठबंधन के साथ मिलकर भी सरकार बना सकते हैं।
जदयू के 85 विधायक और विपक्ष के समर्थन से यह संख्या 126 तक पहुंच सकती है—जो बहुमत 122 से ऊपर है।
यही कारण है कि बीजेपी इस बार कुछ भी जोखिम नहीं लेने के मूड में नहीं है।
• पहले उसने गृह विभाग अपने पास लिया
• अब स्पीकर का पद भी अपने खाते में सुरक्षित कर लिया
सियासी विशेषज्ञ इसे बीजेपी का मास्टर स्ट्रोक बता रहे हैं—ताकि अगर कभी नीतीश कुमार हवा बदलने की कोशिश करें, तो बीजेपी के पास तुरंत राजनीतिक पलटवार का संवैधानिक हथियार मौजूद रहे।







