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विजयादशमी पर तेलडीहा दुर्गा मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विकास कार्यों को लेकर दिए निर्देश

बिहार के बांका जिले अंतर्गत शंभुगंज में स्थित ऐतिहासिक और पौराणिक शक्तिपीठ हरिवंशपुर तेलडीहा दुर्गा मंदिर की छटा इस विजयादशमी पर बेहद खास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रही
 
सम्राट चौधरी

बिहार के बांका जिले अंतर्गत शंभुगंज में स्थित ऐतिहासिक और पौराणिक शक्तिपीठ हरिवंशपुर तेलडीहा दुर्गा मंदिर की छटा इस विजयादशमी पर बेहद खास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रही. शारदीय नवरात्र के समापन अवसर पर जब पूरे क्षेत्र में मां दुर्गा की विदाई और असत्य पर सत्य की जीत का उल्लास था, तब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस प्रसिद्ध धाम में मां के चरणों में शीश नवाते नजर आए.

मंगलवार की सुबह जैसे ही उनका काफिला मंदिर परिसर में दाखिल हुआ, शंभुगंज की पावन माटी जयकारों से गूंज उठी. मुख्यमंत्री ने न केवल विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर राज्य की शांति और समृद्धि की कामना की, बल्कि तेलडीहा मंदिर को एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का बड़ा ऐलान भी किया.

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तेलडीहा दुर्गा मंदिर पहुंचे. मंदिर परिसर में पहुंचते ही बांका जिला प्रशासन की ओर से उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया.

इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर गए, जहां प्रधान पुजारी श्याम आचार्य ने संपूर्ण वैदिक रीति-रिवाजों और गगनभेदी मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना संपन्न कराई. मुख्यमंत्री करीब 15 मिनट तक मंदिर परिसर में रुके और मां दुर्गा का आशीर्वाद लेकर बिहार की निरंतर प्रगति तथा जनता के सुख-चैन की प्रार्थना की.

पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री ने तेलडीहा मंदिर और उसके आसपास चल रही महत्वाकांक्षी विकास परियोजनाओं की गहन समीक्षा की. उन्होंने मंदिर के पास निर्माणाधीन अत्याधुनिक रिवर फ्रंट और उच्चस्तरीय पुल के निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया.

मौके पर मौजूद प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों को निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और इन्हें समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए. उन्होंने कहा कि रिवर फ्रंट और नया पुल बनने से न केवल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन में सहूलियत मिलेगी, बल्कि पूरे शंभुगंज क्षेत्र का परिदृश्य बदल जाएगा.

तेलडीहा दुर्गा मंदिर का चहुंमुखी विकास केवल एक धार्मिक फैसला नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर पड़ने वाला है. इस शक्तिपीठ में सालों भर, खासकर नवरात्र के दौरान, भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं, विश्राम स्थल, स्वच्छ पेयजल और सुगम व्यवस्था विकसित की जाएगी. मंदिर को पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से स्थापित करने से स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार, छोटे व्यापारियों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए आय के नए साधन पैदा होंगे, जिससे पूरे बांका जिले के विकास को नई रफ्तार मिलेगी.