जीतन राम मांझी के बयान पर चिराग का हमला, बोले- युवाओं को तिलचट्टा कहना जायज नहीं
बिहार की राजनीति में बयानों का दौर एक बार फिर गरमा गया है। एनडीए गठबंधन के भीतर ही जुबानी जंग छिड़ती नजर आ रही है, जब केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अपने ही सहयोगी और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के एक विवादित बयान पर करारा हमला बोला है।
जीतन राम मांझी ने दिल्ली में आंदोलनरत युवाओं को 'तिलचट्टा' कहा था, इस पर चिराग पासवान ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना किसी भी सूरत में जायज नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने छात्र आंदोलनों और राजनीतिक हालातों पर भी खुलकर अपनी बात रखी है।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी द्वारा युवाओं को 'तिलचट्टा' कहे जाने वाले बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने साफ कहा कि कुछ लोग सिर्फ अपनी व्यक्तिगत या राजनीतिक जमीन बचाने के लिए इस तरह के अनर्गल बयान दे रहे हैं, जिन्हें कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
दरअसल, जीतन राम मांझी ने अपने सोशल मीडिया (X) पर तीखा बयान देते हुए कहा था, 'भारत की भूमि शेरों की धरती है। भारत माता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे शेर पैदा किए हैं, जो न कॉकरोचों से डरते हैं और न ही झींगुरों से। हमें पता है कि तिलचट्टों और झींगुरों से कैसे निपटना है।
चिराग पासवान ने नसीहत देते हुए कहा कि देश और समाज के भविष्य यानी युवाओं के लिए ऐसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना बिल्कुल गलत है। नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर बोलते समय अपनी भाषा और मर्यादा का पूरा ध्यान रखना चाहिए। चिराग ने कहा कि कुछ लोग अपनी राजनीति करने के लिए कुछ भी बोल देते हैं, ऐसे बयान नहीं देना चाहिए।
जीतन राम मांझी द्वारा तेलचट्टा जैसे शब्दों से युवाओं को संबोधित करना कतई जायज नहीं है। छात्र आंदोलन होता है और छात्र का आंदोलन अगर हो रहा है तो ये आंदोलन ही भारत को रास्ता भी दिखाता है। लेकिन, आंदोलन शांतिपूर्वक होना चाहिए। लोकतंत्र में अराजकता का माहौल नहीं होना चाहिए। केंद्र सरकार ने कल जिस तरीके से आंदोलन को नियंत्रित करने का प्रयास किया, वो ठीक है।







