Newshaat_Logo

SIR पर घमासान के बीच CM Samrat का पलटवार! राहुल-तेजस्वी को दिया करारा जवाब

Bihar Politics:  बिहार में SIR को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि SIR के दौरान BLO ने घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया और दावे-आपत्तियों के लिए लोगों को मौका दिया गया. सम्राट के मुताबिक प्रक्रिया में करीब 7.42 करोड़ मतदाताओं की पहचान...
 
SAMRAT CHAUDHARY

Bihar Politics: बिहार शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय और जिला कार्यालयों में लंबे समय से एक ही जगह तैनात कर्मचारियों की पोस्टिंग व्यवस्था में बदलाव की तैयारी चल रही है। विभाग कर्मचारियों के कैडर और ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े नियमों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद संबंधित संवर्ग के कर्मचारियों को प्रशासनिक जरूरत के अनुसार बिहार के किसी भी जिले में तैनात किया जा सकेगा।

Rahul Gandhi Meets Tejashwi Yadav In Patna

हालांकि, अभी प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में राज्य के किसी भी जिले में पोस्टिंग और पांच साल की अवधि समेत प्रस्तावित प्रावधानों को फिलहाल अंतिम नियम नहीं माना जा सकता।

पांच साल बाद बदल सकती है पोस्टिंग

विभागीय स्तर पर तैयार किए जा रहे प्रस्ताव में कर्मचारियों के लिए एक निश्चित अवधि के बाद तबादले का प्रावधान किए जाने पर विचार हो रहा है। इसके लिए करीब पांच साल की अवधि तय किए जाने की चर्चा है।

यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो किसी कर्मचारी के एक स्थान पर पांच साल पूरे होने के बाद प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर उसकी पोस्टिंग दूसरे जिले में की जा सकती है। हालांकि, अंतिम नियम में अवधि और तबादले की प्रक्रिया क्या होगी, यह मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।

राज्य स्तर पर बढ़ सकता है कैडर का दायरा

मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग संवर्ग के कर्मचारियों का कैडर जिला, प्रमंडल या राज्य स्तर का हो सकता है। कैडर का दायरा सीमित होने की वजह से कर्मचारियों की पोस्टिंग भी अक्सर उसी निर्धारित क्षेत्र तक सीमित रहती है।

प्रस्तावित व्यवस्था में यदि संबंधित संवर्ग का कैडर राज्य स्तर पर किया जाता है, तो कर्मचारी को केवल अपने जिले या प्रमंडल में ही नहीं, बल्कि बिहार के किसी भी जिले में पोस्टिंग दी जा सकती है। इससे विभाग के पास कर्मचारियों की तैनाती के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।

जरूरत के हिसाब से होगा कर्मचारियों का रैशनलाइजेशन

नई व्यवस्था में रैशनलाइजेशन यानी कर्मचारियों के जरूरत के अनुसार पुनर्विन्यास पर भी जोर दिए जाने की बात सामने आई है।

जिन कार्यालयों में काम की तुलना में कर्मचारियों की संख्या अधिक है, वहां से कर्मचारियों को ऐसे कार्यालयों में भेजा जा सकता है जहां काम का दबाव ज्यादा है और कर्मचारियों की संख्या कम है। इससे अलग-अलग कार्यालयों में कर्मचारियों की उपलब्धता और कार्यभार के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जाएगा।

वर्षों से एक ही कार्यालय में जमे कर्मचारियों पर पड़ेगा असर

शिक्षा विभाग के अधीनस्थ कार्यालयों में लिपिकीय और अन्य संवर्ग के कई कर्मचारी लंबे समय से एक ही कार्यालय में तैनात रहे हैं। इस दौरान अधिकारियों का तबादला होता रहा, लेकिन कुछ कर्मचारी लंबे समय तक उसी कार्यालय में काम करते रहे।

एक ही कार्यालय में लंबे समय तक काम करने से कर्मचारियों को वहां की फाइलों, प्रक्रियाओं और स्थानीय कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी हो जाती है। वहीं, नए अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी कई बार पुराने कर्मचारियों के अनुभव और सहयोग पर निर्भर रहती है।

विभाग अब लंबे समय तक बनी रहने वाली इस तरह की निर्भरता को कम करने और कर्मचारियों की तैनाती को अधिक गतिशील बनाने की दिशा में बदलाव पर विचार कर रहा है।

शिक्षकों के बाद कर्मचारियों की ट्रांसफर व्यवस्था में बदलाव की तैयारी

शिक्षा विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग व्यवस्था को लेकर पहले से ही बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। शिक्षकों के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया आधारित स्थानांतरण व्यवस्था लागू किए जाने के बाद अब विभागीय कर्मचारियों की तैनाती व्यवस्था को भी अधिक व्यवस्थित और जरूरत आधारित बनाने की तैयारी है।

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के स्तर से भी ट्रांसफर-पोस्टिंग व्यवस्था में बदलाव पर जोर दिए जाने की बात सामने आई है। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों की पोस्टिंग को कार्यालय की जरूरत, उपलब्ध मानव संसाधन और प्रशासनिक आवश्यकता से जोड़ना है।

किन कर्मचारियों पर लागू होगा नियम?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित नई व्यवस्था के दायरे में शिक्षा विभाग के किन-किन संवर्गों के कर्मचारी आएंगे। साथ ही पांच साल की अवधि पूरी होने के बाद तबादला अनिवार्य होगा या प्रशासनिक जरूरत के आधार पर किया जाएगा, यह भी अंतिम नियम में स्पष्ट होगा।

विभागीय प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद ही कैडर का दायरा, तबादले की अवधि, रैशनलाइजेशन की प्रक्रिया और कर्मचारियों की पोस्टिंग के मानक स्पष्ट हो सकेंगे।

यदि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है तो बिहार शिक्षा विभाग के जिला और क्षेत्रीय कार्यालयों में लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात कर्मचारियों की पोस्टिंग में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे जहां कर्मचारियों को नई जगह जिम्मेदारी मिल सकती है, वहीं अधिक कार्यभार वाले कार्यालयों में मानव संसाधन की कमी दूर करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।