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दही–चूड़ा की थाली पर सियासत और संस्कृति का संगम: मकर संक्रांति पर विजय सिन्हा के आवास पहुंचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

 
Nitish Kumar

Bihar political update: मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बिहार की राजनीति में परंपरा और संवाद का खूबसूरत दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के आवास पर आयोजित दही–चूड़ा भोज में शामिल हुए। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित राज्य सरकार के कई मंत्री और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद के चित्र पर मुख्यमंत्री द्वारा माल्यार्पण के साथ हुई, जिसने आयोजन को वैचारिक और सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की।

Nitish kunar

दही–चूड़ा भोज केवल एक पारंपरिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह आम लोगों से जुड़ने और संवाद स्थापित करने का माध्यम भी बना। मकर संक्रांति के दिन ऐसे भोज बिहार की राजनीति में विशेष स्थान रखते हैं, जहां नेता औपचारिकता से बाहर आकर सीधे जनता से रूबरू होते हैं। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा हर वर्ष इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं। इससे पहले सोमवार को उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र लखीसराय में भी भव्य दही–चूड़ा भोज का आयोजन किया था, जिसमें हजारों लोगों की भागीदारी रही।

विजय सिन्हा का कहना है कि दही–चूड़ा जैसे आयोजनों से न सिर्फ लोक परंपराएं जीवित रहती हैं, बल्कि सामाजिक समरसता और राजनीतिक संवाद को भी नई ऊर्जा मिलती है। यही वजह है कि यह पर्व सत्ता और समाज के बीच दूरी को कम करने का अवसर बन जाता है।

Vijay Kumar Sinha

बिहार में मकर संक्रांति सिर्फ धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक मानी जाती है। दही–चूड़ा, तिलकुट और पारंपरिक मिठाइयों के साथ मनाया जाने वाला यह त्योहार सादगी, समानता और सामूहिकता के भाव को दर्शाता है। गांवों से लेकर शहरों तक, हर वर्ग और तबके के लोग इसे एक समान उत्साह के साथ मनाते हैं।

वर्ष 2026 में बिहार में मकर संक्रांति 14 और 15 जनवरी को मनाई जा रही है। खगोलीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का मुख्य दिन 14 जनवरी है, जबकि कई परंपराओं में उत्सव 15 जनवरी तक चलता है। इसी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में आयोजित दही–चूड़ा भोज ने यह संदेश दिया कि बिहार में त्योहार केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज और सियासत को जोड़ने की एक मजबूत कड़ी भी हैं।