फार्मर रजिस्ट्री में ढिलाई बर्दाश्त नहीं- उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा का अल्टीमेटम, मिशन मोड में काम नहीं तो होगी सख्त कार्रवाई
Bihar news: एग्री स्टैक परियोजना के तहत फार्मर रजिस्ट्री के काम में सुस्ती अब अधिकारियों पर भारी पड़ सकती है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने साफ कर दिया है कि यह योजना सिर्फ एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य से जुड़ा अहम मिशन है। उपमुख्यमंत्री सह मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जमाबंदी के बकेट क्लेम और सत्यापन में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा। ऐसे में सभी अंचल अधिकारी, राजस्व अधिकारी और कर्मचारी इस कार्य को मिशन मोड में लें और प्रतिदिन तय लक्ष्य के अनुसार प्रगति सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मुख्य सचिव स्तर से होने वाली दो चरणों की समीक्षा इस बात का प्रमाण है कि सरकार इस परियोजना को लेकर पूरी तरह गंभीर है। जहां भी शिथिलता सामने आएगी, वहां जिम्मेदारी तय होगी।
इधर, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव गोपाल मीणा ने भी जिलों और अंचल कार्यालयों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि 3 जनवरी 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति की समीक्षा की जाएगी, जिसमें सभी जिलों के समाहर्ता और कृषि व राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। खास बात यह है कि इस परियोजना पर केंद्र सरकार की भी लगातार नजर बनी हुई है।
विभागीय आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। कृषि विभाग द्वारा सत्यापित ई-केवाईसी की प्रगति जहां करीब 31 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, वहीं राजस्व विभाग द्वारा जमाबंदी के बकेट क्लेम और सत्यापन की रफ्तार महज 4.8 प्रतिशत पर अटकी हुई है। इसी सुस्ती को देखते हुए मुख्य सचिव ने दो चरणों में गहन समीक्षा का फैसला लिया है पहला चरण 6 से 9 जनवरी और दूसरा चरण 18 से 21 जनवरी 2026 तक चलेगा।
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि सभी अंचल कार्यालयों को ऑनलाइन पोर्टल पर प्रतिदिन जमाबंदी के बकेट क्लेम और सत्यापन का कार्य अनिवार्य रूप से करना होगा। काम की दैनिक निगरानी अंचल अधिकारी और अपर समाहर्ता स्तर पर होगी, जबकि मुख्यालय स्तर से भी रोजाना समीक्षा की जाएगी।
सचिव गोपाल मीणा ने बताया कि अधिकारियों को किसी तरह की तकनीकी या प्रक्रियागत परेशानी न हो, इसके लिए जिलावार और अंचलवार अद्यतन प्रगति रिपोर्ट, प्रशिक्षण वीडियो और यूजर मैनुअल पहले से उपलब्ध कराए जा चुके हैं। सरकार का साफ उद्देश्य है कि फार्मर रजिस्ट्री के जरिए किसानों को डिजिटल पहचान मिले, योजनाओं का लाभ पारदर्शी और समय पर पहुंचे और भविष्य में उन्हें किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।
अब साफ है फार्मर रजिस्ट्री में लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर विजय कुमार सिन्हा का सख्त रुख भारी पड़ सकता है।







