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उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी बनाने पर डॉ. प्रेम कुमार ने दिया जोर

बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई
 
प्रेम कुमार

बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में ऑनलाइन कोचिंग की गुणवत्ता, परीक्षाओं में प्रश्नों के मानक एवं उत्तर व्यवस्था, सरकारी एवं निजी विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक प्रगति, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन तथा राज्य में उच्च शिक्षा के समग्र विकास एवं सुदृढ़ीकरण से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में उपस्थित अधिकारियों द्वारा माननीय अध्यक्ष के समक्ष विभागीय प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। अधिकारियों ने अवगत कराया कि बिहार ने वर्ष 2023 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को अंगीकृत किया है तथा इसके क्रियान्वयन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्धारित मानकों का अनुपालन किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के अंतर्गत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा स्वीकृत अनुदान इस राशि का उपयोग विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शोध एवं अनुसंधान, आधारभूत संरचना के विकास, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार तथा अकादमिक उन्नयन सहित अन्य स्वीकृत कार्यों के लिए किया जाना है। इससे राज्य में उच्च शिक्षा की संस्थागत क्षमता एवं शैक्षणिक सुविधाओं को और सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी।

बैठक में अकादमियों, परिषदों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थाओं की गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। इस क्रम में कुल 7 अकादमियों एवं 11 अन्य इकाइयों के कार्यकलापों, शोध गतिविधियों तथा प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने से संबंधित विषयों पर चर्चा हुई।

निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के संबंध में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि निर्धारित प्रक्रिया को सरल एवं मानक आधारित बनाया गया है। इसके तहत 10 एकड़ भूमि, निर्धारित फंड तथा अन्य अनिवार्य मानकों की पूर्ति के आधार पर निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना की अनुमति प्रदान करने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण संस्थानों की स्थापना को प्रोत्साहित करना तथा शैक्षणिक मानकों को बनाए रखना है।

बैठक में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना, 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेजों की स्थापना की पहल तथा मॉडल स्कूल के रूप में सरस्वती विद्या निकेतन की स्थापना से संबंधित प्रयासों की जानकारी भी दी गई। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इन पहलों से राज्य में शैक्षणिक अवसरों का विस्तार हुआ है तथा विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने की बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध हो रही हैं। इससे उच्च शिक्षा के लिए दूसरे स्थानों पर होने वाले पलायन में कमी लाने में सहायता मिली है। विशेष रूप से महिलाओं की उच्च शिक्षा में भागीदारी में निरंतर सुधार हुआ है। विभागीय प्रतिवेदन के अनुसार, महिलाओं का उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) राष्ट्रीय औसत से लगभग 3 प्रतिशत अधिक है।

 

बैठक में कायाकल्प योजना के अंतर्गत आवंटन की जानकारी दी गई। साथ ही, बालिकाओं के लिए पोशाक एवं छात्रवृत्ति तथा मध्याह्न भोजन जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्राथमिक शिक्षा में नामांकन, उपस्थिति एवं शैक्षणिक निरंतरता को प्रोत्साहन मिलने की बात बताई गई।

राज्य के शिक्षा बजट एवं उच्च शिक्षा के लिए किए जा रहे वित्तीय प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पात्र विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा तथा पीएचडी के लिए चार वर्षों तक प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान किए जाने की व्यवस्था की जानकारी दी गई। इन प्रयासों का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्गों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।

अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने ऑनलाइन कोचिंग की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने तथा प्रश्नपत्रों के स्तर, प्रश्नों की गुणवत्ता और उत्तर व्यवस्था को अधिक प्रभावी एवं विश्वसनीय बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में आधारभूत संरचना के विकास कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने तथा ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक उच्च शिक्षा की सुलभ पहुँच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

उन्होंने शोध एवं अनुसंधान की संस्कृति को प्रोत्साहित करने, नवाचार को बढ़ावा देने तथा शैक्षणिक संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उच्च शिक्षा संस्थानों की कार्यप्रणाली, शैक्षणिक अनुशासन एवं प्रशासनिक व्यवस्था में निरंतर सुधार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

अध्यक्ष ने राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक प्रयासों, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी तथा शैक्षणिक आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण की दिशा में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने उच्च शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ एवं समावेशी बनाने तथा राज्य के प्रत्येक क्षेत्र के विद्यार्थियों को समान शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर बिहार विधान सभा सचिवालय के प्रभारी सचिव श्री संजय कुमार सिंह, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन, निदेशक प्रो. एन. के. अग्रवाल सहित अन्य वरीय पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।