Newshaat_Logo

‘सरकारी बंगला किसी की बपौती नहीं’-राबड़ी आवास विवाद पर सम्राट चौधरी का बड़ा हमला

 
‘सरकारी बंगला किसी की बपौती नहीं’-राबड़ी आवास विवाद पर सम्राट चौधरी का बड़ा हमला
Bihar News: बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर जारी विवाद अब पूरी तरह सियासी मुद्दा बन चुका है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को शेखपुरा में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकारी बंगला किसी की “बपौती” नहीं होता। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को सरकारी आवास से इतना लगाव हो गया है कि “बेटे के लिए अलग घर चाहिए और मां के लिए अलग घर चाहिए।”

सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता की समस्याओं की चिंता छोड़ कुछ नेता सिर्फ अपने सरकारी आवास बचाने में लगे हुए हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि वे कई बार मंत्री और बिहार के गृह मंत्री रहे, लेकिन हमेशा सीमित संसाधनों में रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा, “जब मैं मुख्यमंत्री आवास में गया तो मैंने साफ कहा कि बाहर लिख दीजिए यह लोकसेवक का आवास है, किसी की निजी संपत्ति नहीं।” उन्होंने बताया कि 1999 से अब तक वे 11 बार अलग-अलग सरकारी आवास बदल चुके हैं।

सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ा था, तब बिना किसी नोटिस के अपना सरकारी बंगला खाली कर दिया था। उन्होंने कहा कि यही लोकतांत्रिक परंपरा और सरकारी व्यवस्था का सम्मान है।

दरअसल, बिहार सरकार ने 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने के लिए लालू परिवार को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। भवन निर्माण विभाग की ओर से इससे पहले 25 नवंबर 2025 को भी नोटिस जारी किया गया था, लेकिन अब तक आवास खाली नहीं किया गया।

बताया जा रहा है कि इस बंगले में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव रह रहे हैं। वहीं सरकार की ओर से राबड़ी देवी को 39 हार्डिंग रोड स्थित नया सरकारी आवास आवंटित किया जा चुका है। भवन निर्माण विभाग का कहना है कि कई बार अनुरोध किए जाने के बावजूद अब तक पुराने बंगले को खाली नहीं किया गया है, जिसके बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।

दूसरी ओर राबड़ी देवी पहले ही साफ कर चुकी हैं कि वे किसी भी कीमत पर 10 सर्कुलर रोड का आवास खाली नहीं करेंगी। उन्होंने कहा था कि सरकार चाहे तो फोर्स बुलाकर बंगला खाली करवा ले।

सरकारी आवास को लेकर जारी यह विवाद अब बिहार की राजनीति में नया सियासी ताप पैदा कर चुका है। सत्ता पक्ष इसे नियम और कानून का मामला बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव और प्रतिशोध की कार्रवाई करार दे रहा है।