महागठबंधन में महाघमासान! RJD ने कांग्रेस के खिलाफ उतारा उम्मीदवार, दरभंगा में होगा सीधा मुकाबला?
Bihar Politics: बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव से पहले महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कुमर राय को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इसके साथ ही विधान परिषद चुनाव के लिए RJD के घोषित प्रत्याशियों की संख्या बढ़कर सात हो गई है।
दरभंगा शिक्षक सीट पर RJD के उम्मीदवार उतारने के फैसले ने महागठबंधन के भीतर नए सियासी समीकरण को जन्म दिया है। खास बात यह है कि शुरुआती सीट बंटवारे में यह सीट कांग्रेस के हिस्से में मानी जा रही थी। ऐसे में RJD की ओर से उम्मीदवार उतारे जाने के बाद अब इस सीट पर गठबंधन के दोनों प्रमुख दल आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। Sensational Headlines , Short News , YouTube Title , Thumbnail Text
कांग्रेस के एकतरफा ऐलान के बाद बदला समीकरण
विधान परिषद चुनाव को लेकर RJD ने शुरुआत में छह उम्मीदवारों की सूची जारी की थी। गठबंधन की शुरुआती व्यवस्था के मुताबिक दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस और तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र CPI के हिस्से में माना गया था।
इन दोनों सीटों पर संबंधित दलों का पहले से राजनीतिक प्रभाव रहा है। ऐसे में उम्मीद थी कि महागठबंधन के घटक दल आपसी सहमति के आधार पर उम्मीदवार उतारेंगे और एक-दूसरे के मजबूत क्षेत्रों में सीधे मुकाबले से बचेंगे।
हालांकि, कांग्रेस की ओर से विधान परिषद चुनाव के लिए पांच प्रत्याशियों के नामों की घोषणा के बाद गठबंधन के भीतर नाराजगी की स्थिति बनी। RJD ने कांग्रेस के इस कदम को गठबंधन की सहमति के अनुरूप नहीं माना। इसके बाद राजद ने भी अपने रुख में बदलाव करते हुए दरभंगा शिक्षक सीट से कुमर राय को उम्मीदवार घोषित कर दिया।
दरभंगा सीट पर अब RJD बनाम कांग्रेस
RJD के इस फैसले के बाद दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मुकाबला दिलचस्प हो गया है। जिस सीट को गठबंधन की शुरुआती व्यवस्था में कांग्रेस के खाते में माना जा रहा था, उसी सीट पर अब RJD ने भी अपना प्रत्याशी उतार दिया है।
इससे चुनावी मुकाबला सीधे तौर पर RJD बनाम कांग्रेस की शक्ल ले सकता है। स्थानीय स्तर पर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं की चुनावी रणनीति भी अब महत्वपूर्ण होगी।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, शिक्षक संगठनों का समर्थन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में दोनों दलों के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल भी बन सकती है।
क्या महागठबंधन की एकजुटता पर पड़ेगा असर?
दरभंगा शिक्षक सीट पर RJD की उम्मीदवारी ने महागठबंधन की चुनावी रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर गठबंधन के घटक दल ही एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगे, तो साझा रणनीति किस तरह लागू होगी?
हालांकि, एक सीट पर हुई टक्कर को पूरे गठबंधन के भविष्य से जोड़कर देखना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि उम्मीदवारों के चयन को लेकर सामने आए मतभेद ने दोनों दलों के बीच समन्वय की चुनौती को उजागर किया है।
तिरहुत शिक्षक सीट पर भी रहेगी नजर
दरभंगा के साथ तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। शुरुआती समझ के मुताबिक यह सीट CPI के हिस्से में थी। ऐसे में दरभंगा सीट पर RJD के उम्मीदवार उतारने के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में गठबंधन के अन्य घटक दल सीट बंटवारे को लेकर क्या रुख अपनाते हैं।
यदि अन्य सीटों पर भी सहयोगी दलों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलता है, तो विधान परिषद चुनाव महागठबंधन के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा साबित हो सकता है।
चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले ही उम्मीदवारों के चयन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। RJD की ओर से कुमर राय को दरभंगा शिक्षक सीट से मैदान में उतारना इसी बढ़ती हलचल का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
अब देखना होगा कि कांग्रेस इस फैसले पर क्या रणनीति अपनाती है और क्या दोनों दलों के बीच किसी स्तर पर सहमति बनती है या दरभंगा शिक्षक सीट पर महागठबंधन के दोनों सहयोगी दलों के बीच सीधा चुनावी मुकाबला होता है।
फिलहाल, दरभंगा शिक्षक सीट ने बिहार के महागठबंधन की अंदरूनी सियासत को चुनावी मैदान में ला दिया है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर और सहयोगी दलों के रुख से यह स्पष्ट होगा कि यह टकराव सिर्फ एक सीट तक सीमित रहता है या इसका असर विधान परिषद की अन्य सीटों पर भी दिखाई देता है।







