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अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष में काशी-मथुरा से लेकर धर्मांतरण और गोरक्षा तक कई अभियानों पर VHP का फोकस

 
अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष में काशी-मथुरा से लेकर धर्मांतरण और गोरक्षा तक कई अभियानों पर VHP का फोकस

New Delhi: विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी वर्ष को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने सालभर चलने वाले विभिन्न कार्यक्रमों और अभियानों की रूपरेखा तैयार की है। 27 सितंबर को अशोक सिंघल की 100वीं जयंती के अवसर पर भारत मंडपम में भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा।

VHP के अनुसार, जन्म शताब्दी वर्ष के दौरान उन सभी विषयों और कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा, जिन्हें अशोक सिंघल अपने जीवन में विशेष महत्व देते थे। इनमें काशी और मथुरा से जुड़े मामले, धर्मांतरण के खिलाफ अभियान, वेद एवं संस्कृत का प्रचार-प्रसार, गोरक्षा और गौ-संवर्धन तथा संत समाज के साथ संगठनात्मक जुड़ाव प्रमुख रूप से शामिल हैं।

काशी-मथुरा के मामलों पर विशेष फोकस

VHP ने कहा कि वर्ष 1984 में पहली धर्म संसद के दौरान अयोध्या, काशी और मथुरा को लेकर संत समाज की ओर से संकल्प लिया गया था। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद अब जन्म शताब्दी वर्ष में काशी और मथुरा से संबंधित न्यायालयीन मामलों को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

धर्मांतरण के खिलाफ अभियान को गति देने की तैयारी

अशोक सिंघल के प्रमुख आग्रहों में से एक धर्मांतरण को रोकना था। VHP का कहना है कि धोखे, लालच या भय के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण के खिलाफ संगठन देश के करीब 850 ब्लॉक्स में काम कर रहा है। जन्म शताब्दी वर्ष में इन गतिविधियों को और विस्तार देने की योजना है।

वेद-संस्कृत और गोरक्षा भी एजेंडे में

अशोक सिंघल के वेद और संस्कृत के प्रति विशेष लगाव को देखते हुए इस वर्ष वेदों के प्रचार-प्रसार और संस्कृत के संरक्षण एवं विस्तार को भी प्रमुख विषय बनाया गया है। इसके साथ ही गोरक्षा और गौ-संवर्धन को लेकर चल रहे प्रयासों को आगे बढ़ाने तथा गोहत्या पर केंद्रीय कानून की मांग से जुड़े अभियानों को भी गति देने की बात कही गई है।

संत समाज के साथ जुड़ाव मजबूत करने पर जोर

VHP के मुताबिक, अशोक सिंघल के प्रयासों से देश के अनेक संत अपने धार्मिक कार्यों के साथ हिंदू समाज के संगठन और सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़े। जन्म शताब्दी वर्ष में संत समाज के साथ इस जुड़ाव को और मजबूत करने पर भी विशेष जोर रहेगा।

27 सितंबर को भारत मंडपम से शुरू होगा बड़ा अभियान

जन्म शताब्दी वर्ष का मुख्य उद्घाटन कार्यक्रम 27 सितंबर को भारत मंडपम में होगा। कार्यक्रम में युगपुरुष परमानंद जी महाराज के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के उपस्थित रहने की बात कही गई है।

इसी कार्यक्रम से भगवान श्रीराम के श्रीलंका जाने के मार्ग से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को लेकर एक विशेष अभियान की भी शुरुआत होगी। इन स्थानों की पहचान और खोज के बाद अब वहां सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने की योजना है।

इसके लिए श्री अशोक सिंघल फाउंडेशन ने विशेष स्तंभ तैयार किए हैं, जिन्हें संबंधित स्थानों पर स्थापित किया जाएगा। इन स्तंभों पर उस स्थान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

VHP का कहना है कि अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष उनके विचारों और जिन कार्यों को वे महत्वपूर्ण मानते थे, उन्हें आगे बढ़ाने के लिए समर्पित रहेगा।