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जन-यात्रा की तैयारी के बीच RJD में खुली अंदरूनी कलह, रोहिणी आचार्य बोलीं— दिखावे से नहीं चलेगा

 
जन-यात्रा की तैयारी के बीच RJD में खुली अंदरूनी कलह, रोहिणी आचार्य बोलीं— दिखावे से नहीं चलेगा
Bihar political news: बिहार में बजट सत्र से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की बैठक के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। बैठक के बाद जहां पार्टी के सांसद सुधाकर सिंह ने तेजस्वी यादव की प्रदेश-व्यापी यात्रा का ऐलान किया, वहीं तेजस्वी की बहन और सारण से सांसद रोहिणी आचार्य ने इस पूरी कवायद पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया के जरिए पार्टी नेतृत्व और उसके करीबी लोगों पर निशाना साधते हुए इसे केवल “दिखावा” बताया और तेजस्वी यादव को आत्ममंथन की सलाह दी।

रोहिणी आचार्य का तीखा बयान

रोहिणी आचार्य ने कहा कि चुनावी हार की समीक्षा सिर्फ बैठकों से नहीं होती, बल्कि इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी के भीतर कुछ लोग ऐसे हैं जो नेतृत्व के आसपास रहकर गलत फैसलों को बढ़ावा दे रहे हैं।

उन्होंने लिखा कि जब तक ऐसे “चिन्हित लोगों” पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक किसी भी समीक्षा या सुधार का कोई मतलब नहीं है। अंत में उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा— “जनता सब कुछ समझती है।”

बैठक में क्या हुआ फैसला?

करीब तीन घंटे तक चली RJD संसदीय दल की बैठक के बाद सांसद सुधाकर सिंह ने बताया कि पार्टी ने तय किया है कि लोकसभा के बजट सत्र में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा और विशेष पैकेज देने की मांग जोर-शोर से उठाई जाएगी।

इसके अलावा विधानसभा चुनाव में मिली हार को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसे जल्द ही तेजस्वी यादव को सौंपा जाएगा।

तेजस्वी की ‘जन-यात्रा’ का ऐलान

सुधाकर सिंह ने बताया कि बजट सत्र के दौरान विधानसभा में सरकार को घेरने के बाद तेजस्वी यादव पूरे बिहार की यात्रा पर निकलेंगे। इस यात्रा का मकसद पार्टी संगठन को मजबूत करना और जनता से सीधा संवाद स्थापित करना बताया गया है।

हालांकि, रोहिणी आचार्य के बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या तेजस्वी यादव प्रदेश यात्रा पर निकलने से पहले पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को सुलझा पाएंगे।

राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज

तेजस्वी की यात्रा के ऐलान और रोहिणी आचार्य के खुले बयान ने RJD की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस अंदरूनी असहमति से कैसे निपटता है।