राहुल राज को BJP में शामिल करने पर JDU ने उठाये सवाल, बोले-'ऐसे कैसे कर सकते?'
बिहार विधान परिषद चुनाव के परिणाम आने के बाद एनडीए की एकजुटता अब तार-तार होती दिख रही है. सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में अनुशासनहीनता के नाम पर बागी निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज को भाजपा ने पार्टी से निकाला था. चुनाव जीतने के बाद उन्हें फिर से बीजेपी में शामिल कराने पर जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने सवाल उठाया.
यह बीजेपी का अंदरूनी मामला है, लेकिन जब 15 दिन पहले अनुशासनहीनता के नाम पर निकाल दिया. के लिए निष्कासित कर दिया तो तो फिर कैसे शामिल करा लिया. इसलिए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को इस पर विचार करना चाहिए. आखिर इतनी जल्दबाजी में बीजेपी में शामिल करने की क्या जरूरत थी
बनारस से सोमवार की सुबह पटना पहुंचे जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपनी नाराजगी जतायी और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के नेताओं को इस फैसले पर विचार करने की सलाह दी. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी किसे शामिल करती है, किसे बाहर करती है, यह पार्टी के अंदर की बात है
चुनाव जीतने के कुछ दिन बाद ही 31 अक्टूबर को बीजेपी में पूरे तामझाम के साथ शामिल कर लिया गया. इसके साथ ही तिरहुत स्नातक सीट से बंशीधर ब्रजवासी, जिन्होंने जदयू के अभिषेक झा को हराने का काम किया, इन्हें भी जदयू उम्मीदवारों को हराने के बाद शामिल किया गया. ऐसे में राजनीतिक गलियारे में चर्चा तेज हो गई कि जदयू को हराने वाले कैंडिडेट को जीत के बाद बीजेपी में शामिल क्यों कर लिया गया. जबकि जदयू और बीजेपी दोनों एनडीए के घटक दल हैं.







