जदयू का बड़ा एक्शन! गिरधारी यादव की सांसदी पर संकट, पार्टी ने शुरू की सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया
सांसद का जवाब—“मुझे कुछ नहीं पता”
इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए गिरधारी यादव ने साफ कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा, “जब स्पीकर मुझसे सवाल करेंगे, तभी मैं जवाब दूंगा। अभी मुझे नहीं पता कि पार्टी ने क्या आरोप लगाए हैं।”
SIR विवाद से शुरू हुआ टकराव
दरअसल, गिरधारी यादव पहले भी पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाते रहे हैं।
उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का खुलकर विरोध किया था। उनका तर्क था—
अगर लोकसभा चुनाव सही वोटर लिस्ट पर हुए, तो कुछ ही महीनों में वही सूची गलत कैसे हो सकती है?
बेटे के चुनाव ने बढ़ाई मुश्किलें
2025 के विधानसभा चुनाव में भी उनका परिवार चर्चा में रहा।
उनके बेटे चाणक्य प्रकाश रंजन ने राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ा।
हालांकि वे हार गए, लेकिन इस कदम को जदयू के खिलाफ माना गया और तभी से कार्रवाई की अटकलें तेज हो गई थीं।
लंबा राजनीतिक अनुभव, अब घिरते नजर आ रहे
गिरधारी यादव चार बार सांसद और चार बार विधायक रह चुके हैं।
उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में जयप्रकाश नारायण यादव को बड़े अंतर से हराया था।
पहले भी बयानों से रहे विवादों में
साल 2023 में महुआ मोइत्रा से जुड़े ‘कैश फॉर क्वेरी’ मामले में भी उन्होंने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
इतना ही नहीं, उन्होंने संसद में यह भी स्वीकार किया था कि उनके सवाल उनके स्टाफ तैयार करते हैं।
बढ़ सकता है सियासी विवाद
अब जदयू की इस कार्रवाई से बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
अगर सदस्यता रद्द होती है, तो यह न सिर्फ गिरधारी यादव के राजनीतिक करियर पर असर डालेगा, बल्कि आगामी चुनावी समीकरण भी बदल सकता है।







