गरीबों की योजनाओं पर ‘नेताजी’ का साया? तेजस्वी यादव के करीबी पूर्व RJD विधायक के परिवार पर सरकारी लाभ लेने के गंभीर आरोप
Bihar political update: बिहार की सियासत में एक बार फिर सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग का मामला तूल पकड़ता दिख रहा है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के करीबी माने जाने वाले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पूर्व विधायक रामवृक्ष सदा के परिवार पर गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठाने के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि विधायक रहते हुए भी उनके परिवार ने राशन योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ लिया।
पत्नी के नाम राशन कार्ड, बेटे के नाम पक्का घर
मामला अलौली विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है, जहां से रामवृक्ष सदा वर्ष 2020 में विधायक चुने गए थे। आरोपों के अनुसार, पूर्व विधायक की पत्नी सुशीला देवी के नाम से जारी राशन कार्ड पर आज भी छह सदस्यों के नाम दर्ज हैं। इस कार्ड के जरिए हर महीने बड़ी मात्रा में गेहूं और चावल का उठाव किया जा रहा है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, अंतिम बार 5 दिसंबर 2025 को भी अनाज उठाया गया।
इतना ही नहीं, पूर्व विधायक के पुत्र रामानंद सदा को वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान बनाने के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि भी मिली। यह योजना विशेष रूप से बेघर और अत्यंत गरीब परिवारों के लिए निर्धारित है।
नियमों के बावजूद नहीं कटा नाम?
जानकारी के अनुसार, विधायक बनने के बाद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत परिवार का नाम राशन कार्ड से हटाया जाना चाहिए था। लेकिन आरोप है कि यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई और वर्षों तक अनाज का लाभ लिया जाता रहा। स्थानीय राशन डीलर ने भी पुष्टि की है कि सुशीला देवी के नाम पर नियमित रूप से अनाज का वितरण हुआ है।
पूर्व विधायक ने झाड़ा पल्ला
इन आरोपों पर पूर्व विधायक रामवृक्ष सदा ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें बेटे को आवास योजना का लाभ मिलने की जानकारी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनका और उनकी पत्नी का नाम पहले ही राशन कार्ड से कटवाया जा चुका है। वहीं, दूसरी ओर उनके बेटे रामानंद सदा ने स्वीकार किया है कि उन्हें आवास योजना का लाभ मिला है और घर का निर्माण भी कराया गया है।
जांच के संकेत, सियासत गरमाई
मामले पर संबंधित विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पुराना प्रकरण हो सकता है, लेकिन तथ्यों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। वहीं, राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्ष इसे गरीबों के हक पर डाका बता रहा है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर जांच की संभावना जताई जा रही है।
अब सवाल यह है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी, या मामला फाइलों में ही सिमटकर रह जाएगा। फिलहाल, यह प्रकरण बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे चुका है।







