Newshaat_Logo

बिहार में वीआईपी सुरक्षा को लेकर नई बहस, निशांत कुमार को मिली वीआईपी सुरक्षा, विजय कुमार सिन्हा का सुरक्षा घेरा घटा...

Bihar Politics: बिहार की सियासत में इन दिनों सिर्फ कुर्सियां ही नहीं बदल रही हैं, बल्कि पावर के समीकरण भी पूरी तरह नए सिरे से लिखे जा रहे हैं. सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनते ही राज्य के रसूखदार नेताओं के सुरक्षा घेरों में ऐसी तब्दीली आई है जिसने सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है. सबसे ज्यादा चौंकाने वाली खबर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर आई है. निशांत कुमार, जो अब तक लाइमलाइट से दूर रहते थे, अब 'Z' श्रेणी की सुरक्षा के कड़े घेरे में रहेंगे.
 
NISHANT VIJAY KUMAR SINHA

Bihar Politics: बिहार में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गृह विभाग ने बड़ा फैसला लिया है. दोनों डिप्टी सीएम के बाद अब दो और नेताओं की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. गृह विभाग के आदेश के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को Z श्रेणी सुरक्षा दी गई है. दोनों डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव को भी जेड (Z) श्रेणी सुरक्षा दी गई है. वहीं, पूर्व मंत्री श्रवण कुमार को Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिली है. जबकि पूर्व डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की सुरक्षा श्रेणी घटा दी गई है. पूर्व डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की सुरक्षा पहले Z+ श्रेणी की थी, जिसे अब घटाकर Z श्रेणी कर दिया गया है.

बिहार की यात्रा पर निकलेंगे निशांत

निशांत 8 मार्च को जदयू ज्वॉइन करने के बाद से लगातार सक्रिय है. नई सरकार में उनके शामिल होने को लेकर काफी कयासबाजी रही, लेकिन उनका फोकस संगठन पर है. जल्द ही वे पूरे बिहार की यात्रा पर निकलेंगे, जिसकी तैयारियां भी संगठन के स्तर पर शुरू हो चुकी है. इस यात्रा और निशांत की सक्रियता को देखते हुए ही उन्हें Z श्रेणी सुरक्षा दी गई है.

विजय कुमार सिन्हा के समर्थकों की बढ़ सकती है नाराजगी

वहीं, पूर्व डिप्टी सीएम विजय सिन्हा पिछली सरकार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का जिम्मा संभाल रहे थे. मंत्री रहते हुए जनसुनवाई और कार्रवाई की वजह से काफी चर्चा में रहे थे. नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए विजय सिन्हा भी दावेदार माने जा रहे थे. लेकिन, पार्टी ने उनसे ही सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव पेश करवा दिया, जिसके चलते उनके समर्थक खासे नाराज दिख रहे हैं. सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारे में सिन्हा समर्थक खुले रूप से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. अब सुरक्षा घटाए जाने के बाद यह नाराजगी और तेज हो सकती है. हालांकि गृह विभाग के अधिकारियों ने वजह बताते हुए कहा कि वे डिप्टी सीएम नहीं हैं और मंत्री भी नहीं हैं. ऐसे में उनकी सुरक्षा से संबंधित नया फैसला लिया गया है.

दोनों डिप्टी सीएम को टू-लेयर सिक्योरिटी

राज्य में पहली बार 15 अप्रैल को बीजेपी सरकार का गठन होने के बाद यह आदेश जारी किया गया है. दोनों उप मुख्यमंत्रियों को मिली ‘जेड' श्रेणी की सुरक्षा में प्रशिक्षित कर्मियों शामिल हैं, जो उन्नत हथियारों से लैस होती है. डिप्टी सीएम की सुरक्षा दो स्तरों पर की जाएगी. एक चलती सुरक्षा (मोबाइल सुरक्षा व्यवस्था) और दूसरी उनके आवास की स्थायी सुरक्षा होगी.