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बापू सभागार में नितिन नवीन का अभिनंदन, बोले- शॉर्टकट से नहीं, लंबी मेहनत से बनती है राजनीति

 
बापू सभागार में नितिन नवीन का अभिनंदन, बोले- शॉर्टकट से नहीं, लंबी मेहनत से बनती है राजनीति
Bihar news: राजधानी के बापू सभागार में भाजपा की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के सम्मान में भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पहुंचे पार्टी कार्यकर्ताओं ने भगवा गमछा लहराकर उनका स्वागत किया। मंच से “मोदी–नीतीश” की जोड़ी पर आधारित गीत बजाए गए और पूरे सभागार में उत्साह का माहौल दिखा।

पहली बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पटना पहुंचे

राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन का यह पहला पटना दौरा है। इस मौके पर उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जो राजनीतिक दल सिर्फ व्यक्ति विशेष के इर्द-गिर्द शुरू होकर खत्म हो जाते हैं, वे देश और राज्य का भविष्य मजबूत नहीं बना सकते। उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन और विचारधारा ही किसी पार्टी को आगे बढ़ाती है।

20 साल की राजनीतिक यात्रा का किया जिक्र

अपने संबोधन में नितिन नवीन ने कहा कि उन्होंने अपने पिता के निधन के बाद वर्ष 2006 में सक्रिय राजनीति की शुरुआत की थी और अब उनकी राजनीतिक यात्रा करीब 20 साल की होने जा रही है। उन्होंने बताया कि उस समय तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष राधा मोहन सिंह ने उन्हें पहली बार चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया था और उस दौर में पार्टी नेतृत्व का पूरा सहयोग मिला।

पीएम मोदी का जताया आभार

नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने जिस भरोसे के साथ उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी है, उसे वे पूरी ईमानदारी से निभाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने बिहार की जनता का भी आभार जताया, जिन्होंने उन्हें लगातार विधानसभा भेजकर सेवा का मौका दिया।

युवाओं को दिया संदेश— राजनीति लंबी दौड़ है

युवा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति में शॉर्टकट का कोई स्थान नहीं है। यह लंबी दौड़ है, जिसमें धैर्य और लगातार मेहनत जरूरी है। अगर देश को आगे बढ़ाना है और प्रधानमंत्री के सपनों का भारत बनाना है, तो हर कार्यकर्ता को अपने हिस्से का पूरा प्रयास करना होगा।

महापुरुषों के विचारों पर चल रही सरकार

उन्होंने अपने भाषण में श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद, अंत्योदय और सुशासन के जिन सिद्धांतों की बात इन नेताओं ने की थी, भाजपा की सरकारें उसी सोच के साथ काम कर रही हैं।