नीतीश कुमार ने भरा राज्यसभा नामांकन, बिहार में सत्ता परिवर्तन की चर्चा तेज
नीतीश कुमार के नामांकन के साथ ही बिहार में सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालिया विधानसभा चुनाव में 89 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और अब पार्टी के भीतर नए मुख्यमंत्री को लेकर मंथन शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में फिलहाल दो नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं—वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जो कोइरी (ओबीसी) समुदाय से आते हैं, और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री Nityanand Rai, जिन्हें संघ पृष्ठभूमि का अनुभवी नेता माना जाता है।
जेडीयू के भीतर बढ़ी हलचल
नीतीश कुमार के इस फैसले ने जेडीयू के भीतर भी हलचल पैदा कर दी है। होली के अगले दिन उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर संसद लौटने का संकेत दिया, जिससे कई कार्यकर्ता आश्चर्यचकित रह गए। इसके बाद कुछ नाराज कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय में विरोध जताया और आरोप लगाया कि भाजपा ने जेडीयू के कुछ नेताओं की मदद से यह सियासी रणनीति बनाई है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित नेताओं की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जनता के नाम भावुक संदेश
नामांकन के बाद नीतीश कुमार ने भावुक संदेश के जरिए बिहार की जनता का आभार जताया। उन्होंने कहा कि दो दशकों से अधिक समय तक जनता के विश्वास ने ही उन्हें राज्य की सेवा करने की ताकत दी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत से ही इच्छा थी कि वे विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा-चारों सदनों के सदस्य बनें। अब राज्यसभा में जाने के साथ उनकी यह इच्छा पूरी होने जा रही है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि नई भूमिका में भी बिहार के विकास के लिए उनका समर्पण बना रहेगा और राज्य की नई सरकार को उनका सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा। नामांकन के समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी ने इस पूरे घटनाक्रम को और भी राजनीतिक महत्व दे दिया।
कब तक मुख्यमंत्री रहेंगे नीतीश?
सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार सांसद के रूप में शपथ लेने तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। इसी बीच जेडीयू के भीतर उनके बेटे निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं, जिसे पार्टी को एकजुट रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। आरजेडी नेता तेजश्वी यादव ने इसे “महाराष्ट्र मॉडल” जैसा राजनीतिक खेल बताया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने इसे नेतृत्व में अचानक बदलाव की रणनीति करार दिया है।
फिलहाल बिहार की राजनीति में सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी किसे मिलती है और राज्य की सियासत किस नई दिशा में आगे बढ़ती है।







