विकसित बिहार’ की ओर नीतीश कुमार का बड़ा कदम: हफ्ते में दो दिन अफसर होंगे जनता के सामने, 19 जनवरी से लागू होगा नया सिस्टम
Bihar political update: केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत’ विज़न की तर्ज पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के लिए अपना स्पष्ट सियासी और प्रशासनिक एजेंडा सामने रख दिया है। नई सरकार के गठन के कुछ ही दिनों बाद लागू किए गए सात निश्चय-3 के तहत अब सरकार का सीधा फोकस ‘विकसित बिहार’ और आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाने पर है। इस दिशा में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख़्त और साफ निर्देश जारी किए हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि 20 नवंबर 2025 को नई सरकार बनने के बाद राज्य को देश के अग्रणी विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के उद्देश्य से सात निश्चय-3 को लागू किया गया। इनमें सातवां निश्चय “सबका सम्मान, जीवन आसान” सीधे तौर पर आम लोगों की रोज़मर्रा की परेशानियों को कम करने पर केंद्रित है।
मुख्यमंत्री ने माना कि लंबे समय से यह शिकायत सामने आती रही है कि लोग अपनी समस्याओं को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते हैं, लेकिन अधिकारी अक्सर कार्यालयों में उपलब्ध नहीं रहते। इसी अनुभव को आधार बनाकर सरकार ने एक नया और जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है।
अब अफसरों से सीधे मिलेगी जनता
नई व्यवस्था के तहत अब हर सप्ताह सोमवार और शुक्रवार को ग्राम पंचायत से लेकर थाना, अंचल, प्रखंड, अनुमंडल, जिला, प्रमंडल और राज्य स्तर तक के सभी सरकारी कार्यालयों में अधिकारी अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे। इन दिनों आम नागरिक सीधे संबंधित पदाधिकारियों से मिलकर अपनी शिकायतें रख सकेंगे।
सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी कार्यालयों में आगंतुकों के लिए बैठने की व्यवस्था, पीने का पानी, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। साथ ही शिकायतों का पंजीकरण, नियमित निगरानी और समयबद्ध निपटारा भी अनिवार्य होगा।
19 जनवरी से लागू होगी व्यवस्था
यह पूरी प्रणाली 19 जनवरी 2026 से राज्यभर में प्रभावी होगी। मुख्यमंत्री का दावा है कि इससे न केवल जनता को राहत मिलेगी, बल्कि प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
नीतीश कुमार ने आम लोगों से इस पहल को और बेहतर बनाने के लिए 10 जनवरी 2026 तक सुझाव भी मांगे हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक जानकार इसे जनता के साथ सरकार के भरोसे को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम मान रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह व्यवस्था ज़मीनी स्तर पर भी उतनी ही प्रभावी साबित होगी, जितनी मज़बूत इसकी घोषणा है, या फिर ‘Ease of Living’ एक बार फिर फाइलों तक ही सीमित रह जाएगी? बिहार की जनता अब सिर्फ़ वादों नहीं, बल्कि नतीजों का इंतज़ार कर रही है।







