बिहार की कुर्सी छोड़ने से पहले नीतीश का बड़ा दांव! जनता दल यूनाइटेड ने दिल्ली में निर्णायक बैठक बुलाई
दिल्ली में होने वाली इस बैठक में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह सहित पार्टी के सभी शीर्ष रणनीतिकार शामिल होंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद इस मंथन का नेतृत्व करेंगे, जहां पार्टी के भविष्य और संगठनात्मक मजबूती पर गंभीर विचार-विमर्श किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले उत्तराधिकार की योजना स्पष्ट करना चाहते हैं। बैठक का मुख्य एजेंडा बिहार में संभावित सत्ता परिवर्तन और मुख्यमंत्री पद के लिए नए विकल्पों पर चर्चा करना है। पार्टी चाहती है कि नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति में भी राजनीतिक संतुलन बना रहे। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से संभावित इस्तीफे और राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच, अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगनी है।
हाल ही में राज्यसभा के लिए नीतीश निर्वाचित हुए हैं। 10 अप्रैल को उनके शपथ ग्रहण से पहले पार्टी अपनी आगे की रणनीति तय करना चाहती है। बिहार में भाजपा और जदयू के गठबंधन वाली नई सरकार के गठन और कैबिनेट की रूपरेखा पर जदयू की इस बैठक में विस्तार से चर्चा होगी। नीतीश कुमार के राष्ट्रीय राजनीति में जाने के बाद जदयू के अस्तित्व और संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए वरिष्ठ नेताओं के साथ मंथन होगा। सत्ता ट्रांसफर के दौरान एनडीए के घटक दलों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना और किसी भी राजनीतिक अस्थिरता को रोकना मुख्य एजेंडा है।
नीतीश कुमार की राज्यसभा शपथ ने बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा को हवा दी। दिल्ली में होने वाली उक्त बैठक नीतीश कुमार के इस्तीफे से ठीक पहले आयोजित की जा रही है। ऐसे में जदयू नेतृत्व ये सुनिश्चित करना चाहता है कि सहयोगी दलों के साथ तालमेल और संगठन की पकड़ किसी भी परिस्थिति में कमजोर न हो। बिहार की मौजूदा स्थिति काफी संवेदनशील है। गठबंधन के साथियों का रुख और विपक्ष की रणनीति को देखते हुए जदयू के लिए यह बैठक 'करो या मरो' जैसी साबित हो सकती है। 9 अप्रैल को दिल्ली में होने वाले फैसले यह तय करेंगे कि बिहार में नीतीश युग के बाद की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।







