श्रीबाबू की जयंती पर गरजे कांग्रेस अध्यक्ष, SIR और चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
पटना: बिहार केसरी और राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र की मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने श्रीबाबू के योगदान को याद करते हुए सामाजिक न्याय, छुआछूत के उन्मूलन और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का आह्वान किया। साथ ही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठाए और इसे विपक्षी समर्थकों के नाम हटाने की कोशिश करार दिया।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह और कांग्रेस के अन्य नेताओं की मौजूदगी में कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि श्रीकृष्ण सिंह आधुनिक बिहार के निर्माता थे। उन्होंने जमींदारी प्रथा समाप्त करने, भूमि सुधार, कृषि विकास, उद्योगों की स्थापना, शिक्षा और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में बिहार ने विकास और सुशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की।
श्रीबाबू के योगदान को किया याद
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि श्रीकृष्ण सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आजादी के बाद बिहार के विकास की मजबूत नींव रखी। उनके कार्यकाल में बरौनी तेल रिफाइनरी, खाद कारखानों, थर्मल पावर प्लांट और राजेंद्र पुल जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को बढ़ावा मिला। उन्होंने छुआछूत के खिलाफ भी अभियान चलाया और दलितों-वंचितों को बाबा बैद्यनाथ धाम में प्रवेश दिलाने की पहल की।
उन्होंने कहा कि श्रीबाबू का जीवन सामाजिक समानता, लोकतंत्र और जनकल्याण के प्रति समर्पण का प्रतीक है। आज भी समाज में छुआछूत और भेदभाव की मानसिकता को समाप्त करने की जरूरत है।
SIR और चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल मताधिकार और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके मुताबिक, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर पारदर्शिता जरूरी है और चुनाव आयोग को बताना चाहिए कि बिहार में सूची से बाहर किए गए लोगों में कितने घुसपैठिए थे।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार के बीच कथित मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण देने वाले कानून की भी आलोचना की और इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही के खिलाफ बताया।
उन्होंने कहा, “अगर लोगों का वोट देने का अधिकार नहीं बचा, तो देश का लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा। यह आजादी की दूसरी लड़ाई है और इसमें लोगों को घर बैठने से काम नहीं चलेगा।”
मोदी सरकार के वादों पर भी साधा निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने महंगाई कम करने, कालाधन वापस लाने, हर साल दो करोड़ नौकरियां देने, किसानों की आय दोगुनी करने, सभी को पक्का मकान उपलब्ध कराने और भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने जैसे वादों का जिक्र किया।
उन्होंने दावा किया कि बिहार बेरोजगारी, उद्योगों के बंद होने और विकास के कई मानकों पर पिछड़ा हुआ है। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बीजेपी और आरएसएस बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाकर जाति, धर्म, भाषा और खानपान के आधार पर समाज में विभाजन पैदा कर रहे हैं। उन्होंने निजीकरण के जरिए आरक्षण और सरकारी नौकरियों पर भी असर पड़ने की बात कही।
INDIA गठबंधन की मांगों का किया जिक्र
कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि INDIA गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति के सामने चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कई मांगें रखी हैं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, संबंधित कानून को निरस्त करने, SIR की प्रक्रिया रोकने, कथित तौर पर अवैध रूप से हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने, बैलेट पेपर से चुनाव कराने और कथित वोट चोरी के आरोपों से प्रभावित विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग शामिल है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की रक्षा करना सबसे जरूरी है। इसके लिए विपक्षी दलों का आंदोलन जारी रहेगा।
1 नवंबर की दिल्ली रैली में शामिल होने की अपील
अपने संबोधन के अंत में कांग्रेस अध्यक्ष ने श्रीबाबू को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लोगों से लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की। उन्होंने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली कांग्रेस की रैली में लोगों से शामिल होने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण सिंह जैसे नेताओं के आदर्शों पर चलते हुए सामाजिक समानता, लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।







