CM नीतीश को लेकर विपक्ष का तंज, राज्यसभा जाने पर तीखे और अजीबों-गरीब बयान..“बिहार की तो बहुत बड़ी मुक्ति हो गई”
Bihar Politics: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को दिल्ली में राज्यसभा सांसद की शपथ ली. आने वाले दिनों में वह सीएम पद से इस्तीफा देने वाले हैं. बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है. विपक्षी दलों के नेताओं ने तीखे और व्यंग्यात्मक बयान देने शुरू कर दिए हैं.
कांग्रेस नेता मीरा कुमार ने तो अजीब बयान दिया. उन्होंने कहा कि- ‘बिहार की तो बहुत बड़ी मुक्ति हो गई.’ जबकि, समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि- हम तो चाहते थे कि नीतीश कुमार जी प्रधानमंत्री पद से रिटायर हों. नेता प्रतिपतक्ष तेजस्वी यादव का कहना है कि सीएम नीतीश को अपमानित किया जा रहा है.

कांग्रेस नेता मीरा कुमार क्या बोलीं?
कांग्रेस नेता मीरा कुमार से दिल्ली में पत्रकारों ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर बातचीत की. पत्रकारों ने कहा कि- नीतीश बिहार से दिल्ली शिफ्ट हो रहे हैं. उन्होंने राज्यसभा की शपथ ली है. इस पर मीरा कुमार ने कहा, ‘बहुत मामूली सी बात है. बहुत लोग शपथ लेते हैं. इस पर क्या कहें.’ जब पत्रकारों ने कहा कि जिस तरह से वे (नीतीश कुमार) बिहार छोड़कर आ रहे हैं, अब दिल्ली रहेंगे. इतना सुनते ही उन्होंने जवाब दिया-‘बिहार की तो बहुत बड़ी मुक्ति हो गई.’

अखिलेश यादव क्या बोले?
पूर्व यूपी सीएम और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि- ‘हमारे इंडिया गठबंधन के बहुत सारे साथियों की कोशिश थी कि नीतीश कुमार जी प्रधानमंत्री बनकर रिटायर होते, लेकिन अब सुनने में आ रहा है और यह लग रहा है कि वे राज्यसभा के सदस्य के रूप में रिटायर हो जाएंगे. सोचिए कि लोगों के साथ कितना बड़ा धोखा हुआ है.’ इससे पहले भी अखिलेश यादव एक्स हेंडल पर नीतीश के राज्यसभा जाने पर प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने लिखा था कि- यह “बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा अपहरण” है.

तेजस्वी यादव का रिएक्शन
बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री की स्थिति पर सहानुभूति जताते हुए कहा कि उन पर वर्तमान में बहुत अधिक दबाव है. पुरानी बातों को याद दिलाते हुए कहा कि मैंने पहले ही कहा था कि उन्हें चैन से रहने नहीं दिया जाएगा. तेजस्वी ने कहा कि- नीतीश कुमार की खुद की इच्छा राज्यसभा जाने की बिल्कुल नहीं थी, लेकिन उन्हें जबरदस्ती वहां भेजा जा रहा है. अगर उनकी ऐसी कोई मंशा होती तो मुख्यमंत्री बनने के महज तीन महीने के भीतर ही वह राज्यसभा जाने का फैसला क्यों लेते?







