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पप्पू यादव का तीखा हमला: कहा- चुनाव आयोग RSS-BJP का चपरासी बन चुका है, सुप्रीम कोर्ट से जताई न्याय की उम्मीद

 
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Darbhanga: बिहार की राजनीति में बेबाकी के लिए पहचाने जाने वाले पूर्णिया सांसद पप्पू यादव गुरुवार की देर रात दरभंगा पहुंचे थे। जहां उन्होंने चुनाव आयोग को लेकर जमकर खूब बरसे। उन्होंने जहां पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन और केजे राव की निष्पक्षता की सराहना की, वहीं मौजूदा चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करते हुए उसे "भटियारा आयोग" और "BJP-RSS का चपरासी" करार कर दिया। 

चुनाव आयोग बन गया है सत्ता का दरबारी

पप्पू यादव ने तीखे लहजे में कहा, आज का चुनाव आयोग न संविधान के प्रति जवाबदेह है, न जनता के प्रति। यह आयोग भाजपा और आरएसएस का चपरासी बन गया है। टीएन शेषन और केजे राव के ज़माने में आयोग जनता के लिए खड़ा होता था, अब यह सत्ता के तलवे चाट रहा है। इसके बाद उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल उनकी नहीं, बल्कि बिहार के सवा दो करोड़ गरीब लोगों की है, जिन्हें निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया से वंचित किया जा रहा है।

हमारे सम्मान की नहीं, बिहार की लड़ाई है

पटना में बिहार बंद के दौरान उनके साथ हुई धक्का-मुक्की और चोट लगने के सवाल पर पप्पू यादव ने भावुक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, पप्पू यादव की औकात क्या है? मैं तो बचपन से अपमान झेलता आ रहा हूं। यह लड़ाई मेरे सम्मान की नहीं, बिहार के स्वाभिमान और अस्तित्व की है। अगर बिहार को बचाने के लिए मुझे लाख बार अपमानित होना पड़े, तो मैं तैयार हूं।”

भीड़ में गिरकर चोट लगी, कोई शिकायत नहीं

  • उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कहीं यह नहीं कहा कि उन्हें जानबूझकर गिराया गया।
  • “भीड़ थी, हम गिर पड़े। चोट लगी। पर इसमें शिकायत की क्या बात है? अगर यह चोट बिहार को बचाने की कीमत है, तो हमें मंजूर है।”

सुप्रीम कोर्ट से है आख़िरी उम्मीद

  • वर्तमान चुनावी हालात पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि अब भी देश के लोकतंत्र की उम्मीद सुप्रीम कोर्ट से ही बची है।
  • “हमें पूरा भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट यहां की गरीब जनता के पक्ष में फैसला देगी और चुनाव प्रणाली को बचाएगी।”

पप्पू यादव की यह बयानबाज़ी न केवल वर्तमान चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि आगामी चुनावों में बिहार की राजनीति में टकराव और तेज़ होगा। वे लगातार खुद को आम लोगों की आवाज़ और लड़ाई के प्रतिनिधि के रूप में पेश कर रहे हैं। दरभंगा की धरती से पप्पू यादव ने फिर यह साफ कर दिया कि वे न झुकने वाले हैं, न रुकने वाले। अब देखना होगा कि उनके इस तेवर का असर सियासी समीकरणों पर कैसा पड़ता है।