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पटना हाईकोर्ट सख्त, 49 हजार से ज्यादा उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं करने पर सरकार से मांगा जवाब

 
पटना हाईकोर्ट सख्त, 49 हजार से ज्यादा उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं करने पर सरकार से मांगा जवाब

Bihar news: बिहार सरकार के कई विभागों द्वारा लंबे समय से उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) जमा नहीं करने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मुद्दे पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया है। यह सुनवाई किशोर कुमार द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर हुई।

याचिका में बताया गया है कि राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों ने अब तक करीब 49,649 उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं किए हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि सरकारी योजनाओं में खर्च की गई रकम का सही हिसाब आखिर कहां गया।

CAG रिपोर्ट से खुलासा, 70 हजार करोड़ का हिसाब अधूरा

जनहित याचिका के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2022-23 के बीच लगभग 70 हजार करोड़ रुपये की राशि का हिसाब अब भी सरकारी रिकॉर्ड में लंबित है। यह स्थिति 31 मार्च 2024 तक की बताई गई है।
इस गड़बड़ी पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने भी गंभीर टिप्पणी की है। इससे सरकारी खर्च की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं।

CBI जांच या जज की निगरानी में जांच की मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
इसके अलावा एक विकल्प यह भी रखा गया है कि हाईकोर्ट के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में एक विशेष जांच टीम बनाई जाए, जो इस कथित घोटाले की पूरी जांच करे।

दो महीने में सरकार को देना होगा जवाब

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले पर जवाब मांगा है। अदालत ने कहा है कि इतने बड़े पैमाने पर उपयोगिता प्रमाणपत्रों का लंबित होना वित्तीय अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है।
कोर्ट ने अगली सुनवाई दो महीने बाद तय की है। तब सरकार द्वारा दिए गए जवाब और तथ्यों की समीक्षा की जाएगी।

इस मामले के सामने आने के बाद सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और खर्च के तरीके पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।