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मोकामा में पीके का बड़ा दांव: श्रीकृष्ण बाबू के नाती अमृताश आनंद उतर सकते हैं चुनावी मैदान में

 
मोकामा में पीके का बड़ा दांव: श्रीकृष्ण बाबू के नाती अमृताश आनंद उतर सकते हैं चुनावी मैदान में

बिहार की राजनीति में चर्चाओं का केंद्र बने मोकामा विधानसभा क्षेत्र से इस बार नई सियासी कहानी लिखी जा सकती है। बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह उर्फ श्रीकृष्ण बाबू के नाती और बिहार पुलिस के पूर्व डीजीपी आनंद शंकर के पुत्र अमृताश आनंद जनसुराज पार्टी से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो प्रशांत किशोर (पीके) जल्द ही उनके नाम की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं। अमृताश आनंद ने इसको लेकर पीके से मुलाकात भी की है।

बाहुबलियों का गढ़ और मोकामा की पहचान

मोकामा का नाम आते ही राजनीति में बाहुबली छवि की याद आती है। दशकों तक इस सीट पर अनंत सिंह, सूरजभान सिंह और ललन सिंह जैसे नेताओं का दबदबा रहा है। अनंत सिंह को लोग “छोटे सरकार” के नाम से जानते हैं और उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2020 का विधानसभा चुनाव उन्होंने जेल से लड़कर जीता।


सूरजभान सिंह भी इस इलाके में बड़े कद के नेता रहे हैं और उन पर आपराधिक मामलों की लंबी फेहरिस्त दर्ज रही है। राजनीतिक समीकरणों में आज भी उनका असर माना जाता है।

जनसुराज का नया प्रयोग

ऐसे माहौल में प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने मोकामा में एक नया प्रयोग करने की तैयारी की है। पार्टी की रणनीति है कि इस बार बाहुबल और जातिगत समीकरणों से हटकर, एक साफ-सुथरी छवि और शिक्षित उम्मीदवार को उतारा जाए। इसी सोच के तहत अमृताश आनंद को मैदान में लाने की योजना है।
अमृताश फिलहाल एक शिक्षण संस्थान का संचालन करते हैं और सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। उनकी राजनीतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि, शिक्षित प्रोफ़ाइल और सामाजिक जुड़ाव उन्हें एक मजबूत विकल्प बनाते हैं।

मोकामा का चुनाव या राजनीति की नई दिशा?

विश्लेषकों का मानना है कि मोकामा का चुनाव इस बार केवल सीट जीतने की लड़ाई नहीं होगी, बल्कि यह देखने का मौका भी होगा कि क्या बाहुबल की जमीनी पकड़ पर विकास और बदलाव की राजनीति हावी हो सकती है।
पीके का यह दांव सफल हुआ तो मोकामा पूरे बिहार में राजनीति का नया मॉडल बन सकता है। वहीं अनंत सिंह और सूरजभान सिंह जैसे दिग्गजों की मौजूदगी इस लड़ाई को और दिलचस्प बना रही है।