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बिहार की 18वीं विधानसभा के पहले ही दिन सियासी भूचाल: नीतीश सरकार के मंत्री जमां खान का बड़ा खुलासा-‘महागठबंधन के कई विधायक एनडीए से लगातार संपर्क में, जल्द होगी बड़ी टूट’

 
बिहार की 18वीं विधानसभा के पहले ही दिन सियासी भूचाल: नीतीश सरकार के मंत्री जमां खान का बड़ा खुलासा-‘महागठबंधन के कई विधायक एनडीए से लगातार संपर्क में, जल्द होगी बड़ी टूट’

Bihar news: बिहार की 18वीं विधानसभा का पहला सत्र आज से शुरू हो गया। 5 दिसंबर तक चलने वाले इस सत्र में सोमवार को नवनिर्वाचित विधायकों ने शपथ ग्रहण किया। लेकिन पहले ही दिन सत्र के बाहर ऐसा बयान आया जिसने पूरे राजनीतिक माहौल को हिला दिया। सीएम नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री जमां खान ने दावा किया कि महागठबंधन के कई विधायक एनडीए के संपर्क में हैं और “बहुत जल्द बड़े चेहरे एनडीए में शामिल होते दिखेंगे।”

जमां खान का खुला दावा—“बहुत लोग आएंगे, बातें जारी हैं”

विधानसभा पहुंचने पर जब पत्रकारों ने मंत्री जमां खान से पूछा कि क्या विपक्षी खेमे के विधायक एनडीए से संपर्क में हैं, तो उन्होंने बिना झिझक कहा, “हां, बहुत लोग संपर्क में हैं… बातें चल रही हैं… आप देखिएगा, जल्द कई लोग आएंगे।”

उनका यह बयान साफ संकेत देता है कि नई विधानसभा के गठन के बाद भी राजनीतिक उथल-पुथल जल्दी थमने वाली नहीं है। जमां खान ने यह भी कहा कि विपक्ष के नेता नीतीश कुमार के कामकाज से प्रभावित हैं, इसलिए उनके प्रति झुकाव बढ़ रहा है।

35 सीटों पर सिमट गया महागठबंधन, अब टूट की नई आशंका

हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। पूरा गठबंधन सिर्फ 35 सीटों तक सिमट गया, जबकि एनडीए आरामदायक बहुमत के साथ 202 की संख्या तक पहुंच गया। ऐसे माहौल में अगर विपक्षी विधायकों के टूटने की चर्चा तेज होती है, तो यह सीधे तौर पर तेजस्वी यादव और राहुल गांधी के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।

राजद पहले ही कम संख्या के साथ सदन में पहुंचा है। यदि उस पर और दबाव बढ़ता है, तो तेजस्वी यादव के लिए अपने विधायकों को एकजुट रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाएगी।

महागठबंधन के भीतर असंतोष की खलबली भी बढ़ी

तेजस्वी यादव ने कुछ दिन पहले महागठबंधन के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक की थी, जिसमें उन्हें सर्वसम्मति से नेता प्रतिपक्ष चुना गया। लेकिन बैठक में कई विधायकों की गैरमौजूदगी ने तभी यह संकेत दे दिया था कि भीतरखाने कुछ ठीक नहीं चल रहा।

दूसरी तरफ, कांग्रेस भी अंदरूनी मतभेदों से गुजर रही है। समीक्षा बैठक में कई हार चुके प्रत्याशियों ने तेजस्वी यादव को हार का जिम्मेदार बताया था। कुछ नेताओं के बगावती तेवर खुलकर सामने आ चुके हैं।
यह माहौल महागठबंधन में संभावित टूट के संकेतों को और मजबूत करता दिख रहा है।

आगे की सियासी तस्वीर

सत्र अभी शुरू ही हुआ है और पहले दिन से ही हलचल बढ़ गई है। अगर मंत्री जमां खान का दावा सही साबित होता है, तो आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में एक और बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। सवाल यह है कि, क्या महागठबंधन अपने विधायकों को एकजुट रख पाएगा, या सदन में सत्ता पक्ष की संख्या और बढ़ जाएगी?