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चूड़ा–दही भोज से सियासी संदेश: तेज प्रताप यादव ने मंत्री दीपक प्रकाश को दिया न्योता, नीतीश–तेजस्वी तक जाएगा आमंत्रण

 
चूड़ा–दही भोज से सियासी संदेश: तेज प्रताप यादव ने मंत्री दीपक प्रकाश को दिया न्योता, नीतीश–तेजस्वी तक जाएगा आमंत्रण

Bihar political update: बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति से पहले हलचल तेज हो गई है। जनशक्ति जनता दल के प्रमुख और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव अपने खास चूड़ा–दही भोज को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। तेज प्रताप खुद घर-घर जाकर आमंत्रण पत्र बांट रहे हैं। इसी क्रम में वे राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने बिहार सरकार के नए मंत्री और उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश को व्यक्तिगत रूप से भोज का निमंत्रण सौंपा।

मंत्री दीपक प्रकाश को दिया विशेष न्योता

तेज प्रताप यादव ने दीपक प्रकाश को चूड़ा–दही भोज में शामिल होने का आग्रह किया और इस आयोजन को सामाजिक-सांस्कृतिक परंपरा से जोड़कर बताया। बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति पर चूड़ा–दही भोज की परंपरा पुरानी रही है। वर्षों तक यह आयोजन राजद सुप्रीमो लालू यादव करते रहे हैं, लेकिन इस बार पार्टी और परिवार से अलग राह पर चल रहे तेज प्रताप यादव पहली बार अपने स्तर से इस भोज का आयोजन करने जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश से लेकर तेजस्वी तक आमंत्रण

तेज प्रताप यादव ने साफ किया कि 14 जनवरी, मकर संक्रांति के दिन उनकी पार्टी की ओर से चूड़ा–दही भोज आयोजित किया जाएगा। इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भी औपचारिक निमंत्रण भेजा जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राज्यपाल और दोनों उपमुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रण कार्ड भेजे जाने की तैयारी है।

सामाजिक परंपरा, लेकिन सियासी संकेत भी

तेज प्रताप ने कहा कि यह आयोजन पूरी तरह सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा है। मकर संक्रांति पर चूड़ा, दही, गुड़ और तिलकुट के साथ पर्व मनाने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह भोज रखा गया है। उन्होंने कहा कि बिहार के किसी भी कोने से आने वाले लोग इस आयोजन में शामिल हो सकते हैं।

बदलते सियासी समीकरणों पर नजर

हालांकि इस भोज के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव के रिश्तों में आई दूरी अब खुलकर सामने आ रही है। वहीं दूसरी ओर, तेज प्रताप की भाजपा और एनडीए के कुछ नेताओं से बढ़ती नजदीकियों की चर्चा भी सियासी गलियारों में गर्म है। ऐसे में मकर संक्रांति का यह चूड़ा–दही भोज केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में संभावित नए समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है।