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Political news: पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर सियासत गरम, राजद नेता शिवानंद तिवारी ने किया समर्थन, बोले- ऐसे नेता को जेल क्यों?

 
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Political news: बिहार की राजनीति में पूर्णिया सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर माहौल गरमा गया है। पटना पुलिस ने उन्हें 31 साल पुराने एक मामले में गिरफ्तार किया है। फिलहाल तबीयत खराब होने के कारण पप्पू यादव को पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के कैदी वार्ड में भर्ती कराया गया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद समर्थक लगातार विरोध कर रहे हैं और कई जगहों पर नाराजगी देखी जा रही है।

इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने भी पप्पू यादव के समर्थन में खुलकर बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर गिरफ्तारी की टाइमिंग और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।

शिवानंद तिवारी ने लिखा कि पप्पू यादव बिहार की राजनीति के एक अलग और खास व्यक्तित्व वाले नेता हैं। उन्होंने कहा कि पप्पू यादव ऐसे नेता हैं जिन्होंने तीन बार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। अब तक वे कुल छह बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव जीतकर की थी।

तिवारी ने पप्पू यादव की सक्रियता का जिक्र करते हुए कहा कि उनका शरीर भले भारी है, लेकिन उनकी फुर्ती और ऊर्जा अलग पहचान रखती है। वे लगातार जनता के बीच मौजूद रहते हैं। उन्होंने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय जब कई लोग घरों में थे, तब पप्पू यादव श्मशान घाटों तक जाकर हालात दिखा रहे थे और जरूरतमंदों की मदद कर रहे थे।

उन्होंने यह भी कहा कि कंकड़बाग में जलजमाव के दौरान जब लोग पीने के पानी के लिए परेशान थे, तब पप्पू यादव खुद पानी में उतरकर लोगों तक मदद पहुंचा रहे थे। तिवारी ने कहा कि ऐसे नेता की अचानक पुराने मामले में गिरफ्तारी कई सवाल खड़े करती है।

शिवानंद तिवारी ने न्याय व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कई मामलों में मुकदमे 25–30 साल तक चलते रहते हैं और फिर अचानक गिरफ्तारी हो जाती है। उन्होंने दावा किया कि कई बार समन की जानकारी भी संबंधित व्यक्ति तक ठीक से नहीं पहुंचती।

राजद नेता ने उम्मीद जताई कि पप्पू यादव को जल्द जमानत मिल जाएगी और वे फिर से जनता के बीच सक्रिय नजर आएंगे। फिलहाल इस गिरफ्तारी को लेकर बिहार की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।