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नीतीश के सामने दिखे RCP, मगर नजरें ही रह गईं गवाह! पटना के मंच पर ‘मिलन’ होते-होते रह गया

 
नीतीश के सामने दिखे RCP, मगर नजरें ही रह गईं गवाह! पटना के मंच पर ‘मिलन’ होते-होते रह गया
Bihar news: राजधानी में आयोजित पटेल नवजागरण न्यास के कार्यक्रम में उस वक्त सियासी सरगर्मी बढ़ गई, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह एक ही परिसर में मौजूद थे। मंच और दर्शक दीर्घा के बीच की दूरी ने भले ही औपचारिक मुलाकात को रोक दिया, लेकिन नजरों की खामोश कहानी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी।

कार्यक्रम सिमरा निसरपुरा में ‘सरस्वती बसंत पटेल अतिथिशाला’ के भूमि पूजन और शिलान्यास के लिए आयोजित था। मुख्यमंत्री करीब 10 मिनट के लिए पहुंचे, दीप प्रज्ज्वलित किया, रिमोट से शिलापट्ट का अनावरण किया और बिना भाषण दिए रवाना हो गए। इस दौरान दर्शक दीर्घा में सबसे आगे बैठे आरसीपी सिंह की निगाहें लगातार मुख्यमंत्री पर टिकी रहीं। मौजूद लोगों को एक पल के लिए लगा कि शायद वर्षों की दूरी आज खत्म हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

कुर्मी समाज की उम्मीदें फिर जगीं

इस कार्यक्रम में सत्तापक्ष के कई कुर्मी नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी की इच्छा के बाद नालंदा से पटना तक समाज के एक वर्ग में हलचल तेज है। हालांकि पार्टी के भीतर सहमति को लेकर तस्वीर साफ नहीं है।

कार्यक्रम के बाद जब पत्रकारों ने आरसीपी सिंह से जदयू में वापसी को लेकर सवाल किया तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “हम तो आ ही गए हैं, हमारी तरफ से कोई देरी नहीं है।” इस बयान ने अटकलों को और हवा दे दी।

अतिथिशाला बना सियासी संदेश का मंच

पटेल नवजागरण न्यास की ओर से बन रही इस अतिथिशाला का उद्देश्य समाज के लोगों के लिए किफायती आवास और सामुदायिक केंद्र उपलब्ध कराना है। लेकिन शिलान्यास समारोह केवल सामाजिक आयोजन तक सीमित नहीं रहायह सियासी संकेतों का मंच भी बन गया।

मंच पर मुख्यमंत्री के साथ कई मंत्री, सांसद और विधायक मौजूद थे। पहली बार इतने बड़े स्तर पर सत्तापक्ष के कुर्मी नेताओं का जुटान देखने को मिला।

अब सवाल यही है क्या यह महज संयोग था या आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति कोई नया मोड़ लेने वाली है? फिलहाल, नजरें उसी संभावित ‘मिलन’ पर टिकी हैं, जो इस बार होते-होते रह गया।