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RJD Crisis: करारी हार के बाद आरजेडी में उठे बगावत के बादल, परिवार से संगठन तक हर मोर्चे पर बढ़ी बेचैनी

Bihar political news: चुनावी हार ने खोला ‘संगठन बनाम परिवार’ का नया फ्रंट
 
RJD Crisis: करारी हार के बाद आरजेडी में उठे बगावत के बादल, परिवार से संगठन तक हर मोर्चे पर बढ़ी बेचैनी
Bihar Political news: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली करारी हार ने राष्ट्रीय जनता दल की राजनीति को पूरी तरह हिला दिया है। कभी पंद्रह साल तक सत्ता पर काबिज़ रहने वाली पार्टी आज अपने ही कुनबे और कैडर को संभालने में संघर्ष कर रही है। चुनावी नतीजों के बाद आरजेडी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—संगठन में टूट को रोकना, बिखरे नैरेटिव को फिर से खड़ा करना और परिवार के भीतर बढ़ते तनाव को काबू में रखना।

लालू का ‘MY फ़ॉर्मूला’ इतिहास बना, ज़मीनी राजनीति में दिखा बड़ा बदलाव

लालू प्रसाद यादव की राजनीति की नींव ‘मुस्लिम–यादव (MY)’ समीकरण पर टिकी थी। 1990 के दशक में यह गठजोड़ इतना मज़बूत हुआ कि बिहार की राजनीति उसी धुरी के इर्द-गिर्द घूमती रही।
लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह उलट गई।
    •    यादव मतों में अभूतपूर्व सेंध
    •    मुस्लिम वोट का बड़ा हिस्सा AIMIM की ओर
    •    NDA को अल्पसंख्यक क्षेत्रों में रिकॉर्ड समर्थन

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो तेजस्वी यादव कागज़ पर MY समीकरण गढ़ते रहे, जबकि ज़मीन पर यह गठजोड़ चटक चुका था।

रोहिणी आचार्य का सार्वजनिक विद्रोह—RJD के भीतर भूचाल

तेज प्रताप पहले ही दूरी बना चुके थे। अब चुनावी नतीजों के बीच रोहिणी आचार्य का ‘मेरा कोई परिवार नहीं’ वाला बयान पार्टी के भीतर उमड़ते असंतोष की सबसे बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है।
यह सिर्फ भाई–बहन या परिवार का मतभेद नहीं, बल्कि RJD कैडर की बेचैनी और रणनीतिक फैसलों से उपजे गुस्से का संकेत माना जा रहा है।

AIMIM की बड़ी सेंध—सीमांचल से पूरे बिहार तक बदला समीकरण

2020 में जिस तरह AIMIM ने सीमांचल में दस्तक दी थी, वह 2025 में ठोस बदलाव में बदल गया।
    •    बैसी
    •    जोकीहाट
    •    बहादुरगंज
    •    कोचाधामन
    •    अमौर

इन पांचों मुस्लिम बहुल सीटों पर AIMIM की दमदार जीत ने RJD की सबसे पारंपरिक वोट बैंक पर पकड़ कमजोर कर दी। मुस्लिम–बहुल इलाकों में महागठबंधन ही नहीं, जेडीयू के मुस्लिम उम्मीदवार भी मात खाते दिखे। इधर NDA ने भी इन इलाकों में अपनी सीटें दोगुनी कर यह संकेत दिया कि बिहार की सियासत अब पुराने समीकरणों पर नहीं टिकेगी।

25 सीटों पर सिमटी RJD—दिल्ली की राजनीति पर भी पड़ने वाला है असर

143 सीटों पर उम्मीदवार उतारने के बाद सिर्फ 25 सीटों पर जीत ने पार्टी की भविष्य की राजनीति को संकट में डाल दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
    •    2030 तक राज्यसभा में RJD का एक भी सांसद नहीं बचेगा, यह पार्टी के लिए ऐतिहासिक झटका होगा।
    •    मुस्लिम समुदाय की नाराज़गी कि 18% आबादी के बावजूद उपमुख्यमंत्री का चेहरा नहीं दिया गया, RJD के लिए बड़ा चूक बिंदु बन गया।

तेजस्वी के ‘रणनीतिक सलाहकारों’ पर उठे सवाल—भविष्य में क्या होगा कदम?

रोहिणी की बगावत के बाद अब निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि तेजस्वी यादव संजय यादव और रमीज़ जैसे अपने रणनीतिक सहयोगियों को लेकर क्या रुख अपनाते हैं। कई जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ एक परिवार का विवाद नहीं, बल्कि
RJD के अंदर गहरे स्तर पर पनप रही नाराज़गी, असंतोष और नेतृत्व पर सवालों का इज़हार है।

हार सिर्फ चुनावी नहीं, संगठनात्मक भी

RJD जिस संकट का सामना कर रही है, वह सिर्फ विधानसभा की सीटों का कम होना नहीं, बल्कि
    •    परिवार में दरार
    •    वोट बैंक का बिखराव
    •    संगठन पर पकड़ ढीली
    •    नेतृत्व को लेकर बढ़ते सवाल

इन सबका संयुक्त परिणाम है। यह साफ है कि करारी हार ने RJD को सत्ता से ज्यादा, संगठन और परिवार दोनों मोर्चों पर परीक्षा के कठिन दौर में ला खड़ा किया है।