‘सहकार से समृद्धि’ मिशन को मिली रफ्तार, बिहार में 256 मास्टर ट्रेनरों को मिला प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र
पटना स्थित दीप नारायण सिंह क्षेत्रीय प्रबंधन संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर ग्रामीण बिहार में बदलाव के वाहक बनेंगे। उन्होंने कहा कि सहकारिता आधारित यह मॉडल किसानों को संगठित कर उन्हें आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।
मंत्री ने कहा कि “सहकार से समृद्धि” के लक्ष्य को पूरा करने के लिए किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना जरूरी है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह पहल बिहार में कृषि और सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा देगी।
कार्यक्रम में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह, निबंधक सहयोग समितियां रजनीश कुमार सिंह, वेजफेड के प्रबंध निदेशक डॉ. गगन और संस्थान के निदेशक डॉ. के.पी. रंजन समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सहकारिता विभाग के अनुसार अब तक 256 मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा 302 पीवीसीएस अध्यक्ष, 296 सहायक प्रबंधक, 99 सब्जी पर्यवेक्षक और 3,624 बोर्ड सदस्यों को भी प्रशिक्षित किया गया है।
प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनरों को वैज्ञानिक खेती, आधुनिक फसल प्रबंधन, डिजिटल भुगतान प्रणाली, मोबाइल एप्स और डिजिटल साक्षरता से जुड़ी जानकारी दी गई। विभाग का उद्देश्य किसानों को तकनीक से जोड़कर उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना है।
सबसे खास बात यह रही कि प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनरों ने गांवों में पहुंचकर अब तक 11 हजार से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया है। इससे ग्रामीण स्तर पर सहकारिता आधारित कृषि व्यवस्था को मजबूती मिलने लगी है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में वित्तीय प्रबंधन, ERP सिस्टम, रिकॉर्ड प्रबंधन, ऑडिट व्यवस्था और सहकारी नियमों पर भी विशेष फोकस किया गया। सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ाने, फसलों की बर्बादी कम करने और बाजार तक सीधी पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।







