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बिहार विधानसभा चुनाव से पहले BJP को करारा झटका, कैमूर के दो पूर्व विधायक RJD में शामिल होंगे

 
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले BJP को करारा झटका, कैमूर के दो पूर्व विधायक RJD में शामिल होंगे

Bihar political news: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले दलबदल का दौर तेज हो गया है। राजधानी पटना से लेकर जिलों तक सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कैमूर जिले में बड़ा झटका लगा है। पार्टी के दो वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक राजद (RJD) का दामन थामने वाले हैं।

शनिवार को करेंगे राजद जॉइन
जानकारी के मुताबिक, चैनपुर के तीन बार के विधायक और पूर्व मंत्री बृज किशोर बिंद तथा मोहनियां से दो बार विधायक रह चुके निरंजन राम शनिवार को औपचारिक तौर पर RJD में शामिल होंगे। दोनों नेताओं को खुद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पार्टी की सदस्यता दिलाएंगे। कार्यक्रम दोपहर 12 बजे आयोजित किया जाएगा।

बृज किशोर बिंद की नाराजगी का कारण
बृज किशोर बिंद 2020 के विधानसभा चुनाव से ही भाजपा नेतृत्व से नाराज चल रहे थे। नाराजगी की सबसे बड़ी वजह यह थी कि उनकी मजबूत मानी जाने वाली चैनपुर सीट बीजेपी से लेकर जदयू के खाते में डाल दी गई थी। इसके बाद से ही उनकी राजनीतिक जमीन कमजोर होती चली गई। अब माना जा रहा है कि वे चैनपुर सीट से आरजेडी के टिकट पर किस्मत आजमा सकते हैं।

निरंजन राम ने भी छोड़ा BJP का साथ
मोहनियां से दो बार विधायक रहे निरंजन राम ने भी बीजेपी छोड़ने का ऐलान कर दिया। पिछली बार वे आरजेडी उम्मीदवार संगीता कुमारी से चुनाव हार गए थे। संगीता हाल ही में बीजेपी में शामिल हो चुकी हैं। सीट पर नए समीकरण और टिकट की अनिश्चितता देखते हुए निरंजन राम ने आरजेडी में जाने का फैसला किया।

BJP ने किया डैमेज कंट्रोल का दावा
दोनों नेताओं के पार्टी छोड़ने पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने कहा कि “BJP एक बड़ी पार्टी है, जहां सभी को सम्मान मिलता है। इस दलबदल से पार्टी को कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा।”

कैमूर में BJP की मुश्किलें बढ़ीं
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बृज किशोर बिंद और निरंजन राम के पार्टी बदलने से कैमूर जिले में बीजेपी की स्थिति कमजोर हो सकती है। चैनपुर क्षेत्र में बिंद समुदाय की बड़ी संख्या है, जहां बृज किशोर बिंद की गहरी पकड़ मानी जाती है। वहीं, निरंजन राम का मोहनियां क्षेत्र में भी प्रभाव है। ऐसे में दोनों नेताओं का RJD के साथ आना बीजेपी के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है।