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तेजस्वी यादव का चुनाव आयोग पर तीखा वार, ‘सूत्र’ को कहा ‘मूत्र’, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी को बताया साजिश

 
tejashwi yadav

Bihar, Patna: बिहार की राजनीति में रविवार को उस वक्त घमासान मच गया जब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने महागठबंधन की ओर से बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग और मीडिया में छपने वाली अनाम सूत्रों की खबरों पर जमकर हमला बोला।

तेजस्वी यादव ने वोटर लिस्ट में कथित रूप से विदेशी नागरिकों के नाम शामिल होने की खबरों को “सुनियोजित प्रोपेगैंडा” करार देते हुए अपने तीखे बयान से राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। लेकिन इस बार विवाद उनके शब्दों की तल्खी को लेकर है। उन्होंने चुनाव आयोग के 'सूत्रों' को 'मूत्र' कह दिया।

मूत्र यानी ऐसा अपशिष्ट जो दुर्गंध फैलाता है

तेजस्वी ने कहा, “ये वही सूत्र हैं जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्लामाबाद, कराची और लाहौर पर कब्ज़ा कर चुके थे। इसलिए हम ऐसे ‘सूत्र’ को ‘मूत्र’ समझते हैं। एक ऐसा अपशिष्ट जो बदबू ही फैलाता है।” उनके इस बयान ने न केवल मीडिया जगत में सनसनी फैलाई, बल्कि सोशल मीडिया पर भी तूफान ला दिया। कुछ ही घंटों में #Bihar और #TejashwiYadav 'x' पर ट्रेंड करने लगे।

चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप

तेजस्वी यादव ने दावा किया कि वोटर लिस्ट में विदेशी नामों की बात महज एक बहाना है, असल में यह मतदाता सूची से नाम काटने की एक योजना है। उन्होंने कहा, अगर केवल 1% वोटर्स का नाम हटाया गया तो तकरीबन 7.9 लाख मतदाता प्रभावित होंगे। यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, लोकतंत्र की रीढ़ पर प्रहार है। उन्होंने एक दिलचस्प गणितीय उदाहरण देते हुए कहा कि अगर हर बूथ से सिर्फ 10 नाम भी हटाए जाएं, तो पूरे बिहार में 3200 मतदाताओं का नाम मिट सकता है। यह संख्या किसी भी सीट का खेल पलटने के लिए काफी है।

आयोग सामने आए, मीडिया में छिपकर मत बोले

तेजस्वी ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा, अगर आयोग के पास कहने के लिए कुछ है, तो आधिकारिक रूप से सामने आए। मीडिया में खबरें प्लांट करवा कर लोकतंत्र का मज़ाक न बनाए।

EC की सफाई, लेकिन विवाद शांत नहीं

वहीं चुनाव आयोग ने देर शाम बयान जारी कर कहा कि आखिरी वोटर लिस्ट से ऐसे सभी विदेशी नाम हटा दिए जाएंगे। हमारी प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी है। लेकिन तेजस्वी के तीखे तेवर और "मूत्र" शब्द के प्रयोग से मामला सियासी तूल पकड़ चुका है। विपक्ष जहां तेजस्वी के बयान को 'न्याय की मांग' बता रहा है, वहीं सत्ताधारी दल इसे "मर्यादा की सीमाओं का उल्लंघन" करार दे रहा है।

क्या यह बयान बिहार चुनावों की धुरी बनेगा?

बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव संभावित हैं, और ऐसे में तेजस्वी यादव का यह बयान आने वाले समय में सत्ता और विपक्ष के बीच बहस की नई लकीर खींच सकता है।