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बिहार MLC चुनाव में महागठबंधन की गांठ उलझी, RJD-कांग्रेस आमने-सामने; 8 सीटों पर सियासी समीकरण दिलचस्प

 
बिहार MLC चुनाव में महागठबंधन की गांठ उलझी, RJD-कांग्रेस आमने-सामने; 8 सीटों पर सियासी समीकरण दिलचस्प

Bihar Political News: बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 8 सीटों पर होने वाले चुनाव ने महागठबंधन के भीतर सीटों के तालमेल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। राष्ट्रीय जनता दल ने सितंबर में छह सीटों पर अपने प्रत्याशियों का ऐलान किया था। इसके बाद कांग्रेस ने भी पांच सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए। ताजा स्थिति में दोनों सहयोगी दल तीन स्नातक सीटों पर सीधे आमने-सामने हैं।

चुनाव 23 अक्टूबर को होना है, जबकि मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर को खत्म हो रहा है। ऐसे में नामांकन के साथ ही इन सीटों पर गठबंधन के भीतर की चुनावी रणनीति भी चर्चा में आ गई है।

RJD ने पहले ही छह सीटों पर खोले थे पत्ते

RJD ने 11 सितंबर को आठ में से छह सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित किए थे। पार्टी ने पटना शिक्षक सीट से डॉ. संजीव कुमार सिंह, सारण शिक्षक से प्रो. जयराम यादव, पटना स्नातक से दिलीप कुमार, कोसी स्नातक से नितेश कुमार, दरभंगा स्नातक से अनिल कुमार झा और तिरहुत स्नातक से डॉ. रश्मि विनायक गौतम को मैदान में उतारा था।

उस समय पार्टी ने दरभंगा शिक्षक और कोसी शिक्षक सीटों पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया था। दोनों सीटें कांग्रेस से जुड़े मौजूदा विधान परिषद सदस्यों के प्रतिनिधित्व वाली सीटें थीं।

कांग्रेस ने 5 उम्मीदवारों की सूची जारी की

2 अक्टूबर को कांग्रेस ने पांच प्रत्याशियों की घोषणा की। पार्टी ने दरभंगा शिक्षक सीट से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा को दोबारा मैदान में उतारा है। पटना शिक्षक सीट से संजय यादव को टिकट दिया गया है।

वहीं कांग्रेस ने कोसी स्नातक से मनोज कुमार जायसवाल, दरभंगा स्नातक से रजनीकांत पाठक और पटना स्नातक से असदुल्लाह खान को प्रत्याशी बनाया है।

यानी कांग्रेस और RJD के बीच फिलहाल कोसी स्नातक, दरभंगा स्नातक और पटना स्नातक सीट पर सीधा मुकाबला बन गया है।

सारण शिक्षक सीट पर भी गठबंधन के भीतर अलग राह

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में RJD ने प्रो. जयराम यादव को उम्मीदवार बनाया है। इससे गठबंधन के भीतर चुनावी तालमेल को लेकर सवाल उठे, क्योंकि इस सीट पर CPI की भी दावेदारी रही है।

मौजूदा चुनावी तस्वीर में अलग-अलग सहयोगी दल अपने-अपने संगठनात्मक आधार और उम्मीदवारों के साथ मैदान में हैं। यही वजह है कि इन चुनावों को केवल सामान्य चुनावी मुकाबले के बजाय गठबंधन के अंदर की रणनीति के लिहाज से भी देखा जा रहा है।

दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस ने फिर मदन मोहन झा पर भरोसा जताया

दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की स्थिति बाकी सीटों से कुछ अलग है। यहां कांग्रेस ने अपने मौजूदा विधान परिषद सदस्य डॉ. मदन मोहन झा को ही दोबारा उम्मीदवार बनाया है।

RJD ने इस सीट से प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। ऐसे में यहां दोनों दलों के बीच सीधा मुकाबला नहीं बन रहा है।

तिरहुत शिक्षक सीट पर भी नजर

तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण सीटों में शामिल है। यहां वर्तमान में CPI के प्रो. संजय कुमार सिंह विधान परिषद सदस्य हैं। शुरुआती चुनावी तस्वीर में इस सीट को लेकर महागठबंधन के घटक दलों के बीच तालमेल की चर्चा रही है।

हालांकि, अलग-अलग दलों और नेताओं की स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों के कारण यहां भी चुनावी समीकरण पर नजर बनी हुई है। आठ सीटों पर मुकाबला आगे बढ़ने के साथ उम्मीदवारों की सक्रियता और नामांकन की अंतिम स्थिति तस्वीर को और स्पष्ट करेगी।

2025 विधानसभा चुनाव की खींचतान का असर?

बिहार की राजनीति में गठबंधन के भीतर सीटों को लेकर मतभेद कोई नई बात नहीं है। 2025 विधानसभा चुनाव के दौरान भी महागठबंधन के घटक दलों के बीच कई सीटों पर अलग-अलग दावेदारी और चुनावी तालमेल को लेकर चर्चा हुई थी।

विधान परिषद चुनाव में भी सहयोगी दलों का अलग-अलग सीटों पर मैदान में उतरना गठबंधन के भीतर समन्वय की चुनौती को सामने लाता है। हालांकि, इसे लेकर अंतिम राजनीतिक निष्कर्ष चुनावी नतीजों और आगे की रणनीति के बाद ही निकाला जा सकेगा।

23 अक्टूबर को मतदान, 27 को आएगा रिजल्ट

बिहार विधान परिषद की इन आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा और 27 अक्टूबर को मतगणना प्रस्तावित है। चुनाव में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।

फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा उन सीटों की है, जहां एक ही गठबंधन के घटक दल अलग-अलग उम्मीदवारों के साथ मैदान में हैं। ऐसे में इन चुनावों के नतीजे सिर्फ विधान परिषद की सीटों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि बिहार में विपक्षी दलों के आपसी तालमेल और चुनावी रणनीति को लेकर भी संकेत देंगे।