बांकीपुर में चुनावी रण चरम पर, BJP का किला बचाने उतरे दिग्गज; प्रशांत किशोर और तेजस्वी ने भी झोंकी पूरी ताकत
Political news: बिहार की हाईप्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान से पहले बीजेपी, आरजेडी और जन सुराज ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत लगा दी है। बीजेपी के सामने अपने पुराने गढ़ को बचाने की चुनौती है, जबकि प्रशांत किशोर की जन सुराज और आरजेडी इस सीट पर नया राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश में जुटी हैं। चुनावी नतीजे 3 अगस्त को सामने आएंगे।
बीजेपी ने अपने प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा के पक्ष में प्रचार के लिए पार्टी के कई बड़े नेताओं को मैदान में उतारा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से लेकर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और नित्यानंद राय सहित कई नेताओं ने जनसंपर्क अभियान के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की है। भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह और सांसद मनोज तिवारी जैसे चेहरों की मौजूदगी से भी पार्टी ने चुनाव प्रचार को धार देने का प्रयास किया है। बीजेपी का जोर विकास, राष्ट्रवाद और अपने पारंपरिक मतदाताओं को एकजुट रखने पर है।
वहीं, विदेश दौरे से लौटने के बाद आरजेडी नेता तेजस्वी यादव भी चुनावी मैदान में सक्रिय हो गए हैं। आरजेडी प्रत्याशी रेखा गुप्ता के समर्थन में पार्टी रोजगार, महंगाई और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को लेकर मतदाताओं के बीच पहुंच रही है। आरजेडी की कोशिश शहरी क्षेत्र में अपने आधार को मजबूत करने और बीजेपी विरोधी वोटों को अपने पक्ष में करने की है।
दूसरी ओर, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी बांकीपुर में अपनी पूरी ताकत लगा दी है। पैदल जनसंपर्क, नुक्कड़ संवाद और चाय पर चर्चा जैसे अभियानों के जरिए वह मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं। प्रशांत किशोर पारंपरिक राजनीतिक दलों के विकल्प के तौर पर जन सुराज को पेश कर रहे हैं और स्थानीय मुद्दों को चुनावी बहस के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहे हैं।
स्थानीय समस्याएं भी बन सकती हैं चुनावी मुद्दा
बांकीपुर में चुनावी मंचों पर भले ही बड़े राजनीतिक मुद्दों की चर्चा हो रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर मतदाताओं की प्राथमिकताएं अलग नजर आती हैं। बोरिंग रोड, नाला रोड, दरियापुर गोला, कदमकुआं और यारपुर जैसे इलाकों में जलजमाव, ट्रैफिक जाम, पार्किंग की समस्या और बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोगों में नाराजगी की बात सामने आ रही है। कई मतदाताओं का कहना है कि चुनाव के दौरान नेताओं की सक्रियता बढ़ जाती है, लेकिन स्थानीय समस्याओं का स्थायी समाधान अब भी उनकी बड़ी अपेक्षा है।
‘साइलेंट वोटर’ पर टिकी सभी की नजर
इस उपचुनाव में सबसे अहम भूमिका उन मतदाताओं की मानी जा रही है, जो अपनी पसंद को लेकर खुलकर कुछ नहीं कह रहे हैं। राजनीतिक दलों के बीच इन ‘साइलेंट वोटर्स’ को अपने पक्ष में करने की होड़ तेज है। बीजेपी जहां अपने मजबूत संगठन और पारंपरिक समर्थन पर भरोसा कर रही है, वहीं जन सुराज स्थानीय असंतोष को अपने पक्ष में बदलने की कोशिश कर रहा है। आरजेडी भी शहरी मतदाताओं के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत करने में जुटी है।
फिलहाल बांकीपुर का उपचुनाव बिहार की राजनीति के लिए एक अहम परीक्षा बन गया है। बीजेपी के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती है, तो तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव राजनीतिक बढ़त हासिल करने का बड़ा मौका माना जा रहा है। अब अंतिम फैसला बांकीपुर के मतदाता करेंगे और 3 अगस्त को आने वाला चुनाव परिणाम तय करेगा कि बीजेपी अपना किला बरकरार रखती है या फिर विपक्ष और जन सुराज कोई बड़ा सियासी उलटफेर करने में कामयाब होते हैं।







