बजट सत्र के आखिरी दिन हंगामा! ट्रांसफर नीति और मदरसा भुगतान पर सरकार घिरी
शिक्षकों के अंतर-जिला स्थानांतरण पर उठा सवाल
विधान परिषद में भाजपा एमएलसी नवल किशोर यादव ने शिक्षकों के अंतर-जिला स्थानांतरण का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि एक से आठवीं तक के पुराने वेतनमान वाले स्नातक ग्रेड और प्रधानाध्यापकों का स्थानांतरण मैट्रिक इंटीग्रेटेड शिक्षकों की तर्ज पर नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने मांग की कि सभी श्रेणी के शिक्षकों के लिए स्पष्ट और समान ट्रांसफर नीति बनाई जाए, ताकि किसी के साथ भेदभाव न हो।
इस पर शिक्षा मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि सत्र समाप्त होने के बाद स्थानांतरण प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी और लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सभी को एक साथ संतुष्ट कर पाना संभव नहीं है, लेकिन पारदर्शिता के साथ कार्रवाई की जाएगी।
मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के भुगतान पर भी सरकार से जवाब-तलब
परिषद में संजय कुमार सिंह ने मदरसा और संस्कृत विद्यालयों को आवंटित राशि के भुगतान में देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि सरकार ने मदरसा के लिए 571 करोड़ और संस्कृत विद्यालयों के लिए 411 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन एक वर्ष बाद भी कर्मियों को भुगतान नहीं हो सका है।
उन्होंने सवाल किया कि जब राशि स्वीकृत हो चुकी है तो वितरण में देरी क्यों हो रही है।
वित्त विभाग से समन्वय का आश्वासन
शिक्षा मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि इस मामले में वित्त विभाग से बातचीत की गई है और जल्द ही राशि जारी कर संस्थानों तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि भुगतान प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।
बजट सत्र के अंतिम दिन इन दोनों मुद्दों पर हुई गरमागरम चर्चा ने साफ कर दिया कि शिक्षा और भुगतान से जुड़े सवाल आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस का केंद्र बने रहेंगे।







