विजय सिन्हा का सख्त एक्शन: बिहटा जमीन मुआवजा घोटाले में 11 अफसर-दलालों पर FIR, 55 लाख की लूट उजागर
Bihar news: बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बड़ा प्रहार किया है। बिहटा अंचल में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में करीब 55 लाख रुपये के घोटाले का खुलासा होते ही विभाग में हड़कंप मच गया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने इस मामले में तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी और अंचल अधिकारी (सीओ) समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
साजिश रचकर किसानों का हक हड़पा
निगरानी की जांच में सामने आया कि सिकंदरपुर मौजा में जिन 11 किसानों की जमीन इंडस्ट्रियल पार्क के लिए अधिग्रहित की गई थी, उन्हें मुआवजे की रकम कभी मिली ही नहीं। सरकारी रिकॉर्ड में फर्जी एंट्री कर भुगतान दिखाया गया और करीब 55 लाख रुपये की राशि अधिकारियों व बिचौलियों ने आपस में बांट ली। जांच में यह भी सामने आया कि दस्तावेजों से लेकर भुगतान आदेश तक हर स्तर पर सुनियोजित तरीके से हेराफेरी की गई।
किन पर गिरी गाज
इस संगठित भ्रष्टाचार में पटना के तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, अपर जिला भू-अर्जन अधिकारी, तत्कालीन बिहटा सीओ, कानूनगो, अमीन, सहायक, प्रधान सहायक, राजस्व कर्मचारी और एक बिचौलिया नामजद किए गए हैं। निगरानी की रिपोर्ट के मुताबिक, बिना मिलीभगत के यह घोटाला संभव नहीं था।
अफसरों को दो टूक चेतावनी
मामले के सामने आते ही विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने सभी जिलाधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को साफ संदेश दिया है कि अब मनमानी नहीं चलेगी। समान परिस्थितियों में अलग-अलग फैसले लेने पर जवाबदेही तय की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
किसानों की शिकायत से खुला मामला
यह घोटाला तब उजागर हुआ, जब पीड़ित किसानों ने लिखित शिकायत कर बताया कि उन्हें मुआवजे की राशि नहीं मिली है। बैंक खातों और फाइलों की जांच में साफ हो गया कि कागजों पर भुगतान दिखाया गया, जबकि असल पैसा अफसरों और दलालों की जेब में चला गया।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के सख्त रुख से साफ है कि अब राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति लागू होगी और किसानों के हक से खिलवाड़ करने वालों पर सीधा कानून का डंडा चलेगा।







