पटना ने नासिक, आगरा, कोटा, रांची अमृतसर जैसे शहरों को छोड़ा पीछेे

  • द्वारा

गुरुवार को केंद्र की ओर से जारी इज ऑफ लिविंग इंडेक्स में पटना ने बड़ी छलांग लगाई है. 10 लाख से अधिक की आबादी वाले शहरों की सूची में इस बार पटना 33वें नंबर पर रहा है. महाराष्ट्र का औरंगाबाद, नासिक, वसई विरार, यूपी के मेरठ, आगरा, बरेली, एमपी के जबलपुर, राजस्थान के कोटा, झारखंड के रांची, धनबाद, पंजाब के अमृतसर जैसे शहर हमसे पीछे हैं. इज ऑफ लिविंग इंडेक्स 2018 में पटना 109वें नंबर पर था. गुरुवार को आई रिपोर्ट वर्ष 2019-20 की है, जो कोरोना के कारण अब आई है.

इंडेक्स में अच्छी जिंदगी के अवसर की उपलब्धता एक पैमाना है, जिसमें पटना 42वें नंबर पर रहा है. 39 शहर ग्रीन जोन में रहे, लेकिन मेरठ और जोधपुर के बाद यलो जोन में पटना का नंबर है. कोटा, आगरा, फरीदाबाद, बरेली, गुवाहाटी, धनबाद जैसे शहर इस मामले में हमसे पीछे हैं. मतलब, यहां के लोगों की जिंदगी हमसे बेहतर नहीं है.

इंडेक्स के सस्टेनिबलिटी पैमाने पर पटना का नंबर बहुत पीछे रहा है। 42 नंबर तक के शहर ग्रीन जोन में रहे, जबकि पटना 44वें नंबर पर रहा। हमसे ऊपर रांची है। खुश होना चाहें तो वसई विरार, गुवाहाटी, कोयम्बटूर, कोटा, बरेली जैसे शहर हमसे नीचे हैं।

आमलोगों ने भी इंडेक्स में पटना की रैंकिंग सुधारने में बड़ा योगदान दिया है. सिटीजन परसेप्शन के पैमाने पर पहला नंबर महाराष्ट्र के सोलापुर का है. इस पैमाने में हरेक शहर को उसके बाशिंदों ने ग्रीन जोन में रखा है. इसके बावजूद पटना ने 22वां स्थान हासिल किया है. विशाखापत्तनम, जयपुर, इंदौर, वाराणसी, लुधियाना, रायपुर, फरीदाबाद, बरेली, गाजियाबाद, चंडीगढ़, हैदराबाद, रांची, जबलपुर, दिल्ली, प्रयागराज, नासिक, अमृतसर जैसे शहरों को पटना वालों ने पीछे छोड़ दिया.

https://youtu.be/1NgfMln9lWU