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सम्राट अशोक विवाद: दया सिन्हा के सफाई देने के बाद भी उपेंद्र कुशवाहा ने कहा एक्शन ले केंद्र सरकार
 

अशोक सम्राट को लेकर लेखक दया सिन्हा प्रकाश के विवादित बयान देने के बाद से बिहार में नेताओं की बयानबाजी जारी है। इस विवादित बयान को लेकर अब एक बार फिर जदयू के तरफ से बयान जारी किया गया है। जदयू के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने एक बयान जारी कर कहा कि लेखक दया सिन्हा ने सम्राट अशोक के योगदान पर सवाल उठाया है। सिन्हा का अशोक को लेकर इस तरह का बयान आना बेहद आपत्तिजनक है। 

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि अशोक के बलिदान को हमारे राष्ट्र ने कई अवसरों पर स्वीकार किया है। आज हमारे यहां राष्ट्रीय झंडा में अशोक चक्र को अहम स्थान मिला हुआ है। वहीं अशोक स्तंभ की अपनी प्रतिष्ठा है। ऐसे में दया सिन्हा का सम्राट अशोक पर इस तरह का विवादित बयान देना बेहद शर्मनाक है। ऐसे में उनकी सफाई से संतुष्ट होने का सवाल ही नहीं बनता। इसी के साथ उपेंद्र कुशवाहा ने केंद्र सरकार से मांग की कि लेखक दया सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका लेखन देश की अस्मिता पर हमला है। इसलिए उनका पुरस्कार वापस लिया जाना चाहिए। ताकि भविष्य में कोई भी दुबारा ऐसा करने की हिम्मत न करे। 

जदयू

गौरतलब है कि लेखक दया सिन्हा प्रकाश ने इस पूरे मामले में बीते रोज अपने सफाई दी है। लेखक ने कहा है कि 2012-13 में सम्राट अशोक नाटक लिखा था जो पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुई है। इसमें औरंगजेब का दूर-दूर तक कोई जिक्र ही नहीं है। उन्होंने कहा है कि अशोक और औरंगजेब की कोई तुलना ही नहीं है। अशोक महान थे उन्होंने बौद्ध धर्म अपनानाय लेकिन किसी दूसरे को इसे जबरण अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया। वह बौद्ध श्रमण और वैदिक ब्राह्मणों को बराबर का सम्मान देते थे। उन्होंने कहा कि औरंगजेब धर्मांध था जबकि अशोक सभी धर्मों को समान भाव से देखने वाले थे। लेखक ने कहा, " मैंने औरंगजेब और सम्राट अशोक की कोई तुलना नहीं की है। " 

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