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पटना में खेतिहर मजदूर संगठनों का राज्यस्तरीय कन्वेंशन
 

अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस), बिहार प्रांतीय खेतिहर मजदूर यूनियन और बिहार राज्य खेत मजदूर यूनियन ने संयुक्त रूप से आज पटना के आईएमए हाल में खेतिहर व ग्रामीण मजदूरों का संयुक्त राज्यस्तरीय कन्वेंशन आयोजित किया गया। इस कन्वेंशन का उदघाटन केरल से राज्य सभा सदस्य और ओ एआईएब्लूयू के नेता बी शिवदासन ने किया। वहीं इस कार्यक्रम में पूर्व सांसद नागेंद्र नाथ ओझा और खेग्रामस के महासचिव धीरेंद्र झा सहित जानकी पासवान, सत्यदेव राम, बीरेंद्र प्रसाद गुप्ता, भोला प्रसाद दिवाकर, देवेंद्र चौरसिया और रमाकांत अकेला अध्यक्ष मण्डल में शामिल थे। साथ ही कन्वेंशन में बड़ी संख्या में खेत व ग्रामीण मजदूर संघटनों के नेता व कार्यकर्ता उपस्थित थे। 

उदघाटन करते हुए बी. शिवदासन ने केरल में खेतिहर मजदूरों की स्थिति पर व्यापक चर्चा की और कहा कि केरल की तरक्की का बड़ा कारण खेत मजदूरों की जीवन स्थिति में सुधार है। केरल मजदूरी, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, पेंशन आदि मोर्चे पर देश में अग्रणी पंक्ति में है। आज जरूरत है कि बिहार में भी केरल की तर्ज पर एक व्यापक कानून बनाया जाए, तभी बिहार में खेत व ग्रामीण मजदूरों की जीवन दशा में सुधार संभव है। 

नागेंद्र नाथ ओझा ने कहा कि बिहार में जमींदारी उन्मूलन के बाद खेतिहर मजदूरों ने जमीन, मजदूरी, मान-सम्मान, वास-आवास को लेकर बड़े संघर्ष किए हैं। आज उस पर एक बार फिर हमले हो रहे हैं, हमें इसका मजबूती से जवाब देना होगा। समापन वक्तव्य में खेग्रामस के राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा ने कहा कि नीतीश सरकार में दलितों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर हमले तेज हुए हैं। बकाया मजदूरी मांगने पर समस्तीपुर में सफाई मजदूर रामसेवक राम की पीट-पीट कर थाने में हत्या कर दी गई। उन्होंने ऐलान किया कि गरीबों को उजाड़ने के खिलाफ पूरे बिहार में प्रतिरोध आंदोलन तेज होगा। नया वास-आवास कानून सरकार को बनाना होगा और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के दलित-गरीबों को उजाड़ने पर रोक लगानी होगी। 

कार्यक्रम

धीरेंद्र झा ने आगे कहा कि बिहार में मनरेगा को लूट की योजना बना दी गई है। मनरेगा में 200 दिन काम, 600 रुपये दैनिक मजदूरी और कार्यस्थल पर मजदूरी भुगतान को लेकर किसान आंदोलन की जीत से ऊर्जा लेते हुए खेत मजदूरों-ग्रामीण मजदूरों का आंदोलन तेज होगा। अन्य वक्ताओं नीति रिपोर्ट का हवाला लेते हुए कहा कि नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट ने बिहार के विकास की पोल खोलकर रख दी है। 51.91 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं। गरीबों के कल्याण की सारी योजनाओं में भ्रष्टाचार है। नीतीश कुमार का विकास का दावा पूरी तरह खोखला है।

कन्वेंशन में खेत-ग्रामीण मजदूरों के लिए केंद्रीय कानून, भूमि सुधार आयोग की रिपोर्ट लागू करने, बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए गरीबों को उजाड़ने पर रोक लगाने, मनरेगा में 200 दिन काम व नयूनतम 600 रुपया मजदूरी करने, दलित-गरीबों-महिलाओं-अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले पर रोक लगाने, रामसेवक राम-योगेंद्र पासवान व चन्देश्वर ऋषिदेव के हत्यारे की गिरफ्तारी व पीड़ित परिवारों को मुआवजा, भोजन अधिकार कानून को सख्ती से लागू करने, प्रवासी मजदूरों का रजिस्ट्रेशन कराने , स्वास्थ्य केंद्रों को सही ढंग से चालू करने, समान स्कूल प्रणाली को लागू करने, गरीबों की योजनाओं में मची लूट पर रोक लगाने, सांप्रदायिक उन्माद पर रोक लगाने आदि मांगें उठाई गईं और इन पर आने वाले दिनों में आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया। 

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