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बिहार में अब किताब घोटाला, दिल्ली की एक ही कंपनी से कई विश्वविद्यालय ने खरीदी किताब
 

बिहार में उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी गड़बड़ी लगतार लोगों के सामने आ रही है। पहले बिहार विशेष निगरानी ( एसयूवी) की टीम ने मगध विश्वविद्यालय के कुलपति राजेंद्र प्रसाद के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की। इस छापेमारी में करोड़ो रूपये और अन्य कीमती सामान एवं दस्तावेज बरामद हुए। बता दें, कुलपति प्रो. राजेन्द्र प्रसाद पर विश्वविद्यालय में खरीददारी करने के नाम पर तीस करोड़ रुपये के गोलमाल के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। वहीं अब शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक और गड़बड़ी सामने आ रही है।  बिहार में कई विश्वविद्यालयों के द्वारा किताब खरीद को लेकर गड़बड़ी की बात सामने आई है। ताजा मामला बिहार के कई विश्वविद्यालयों की तरफ से किताबों की खरीद से जुड़ा है।

करोड़ों रुपए की किताब दिल्ली की एक कंपनी से अलग-अलग विश्वविद्यालयों ने खरीदी है। दिल्ली की जिस कंपनी से किताबें खरीदी जा रही है उसका नाम  इंडिका पब्लिशर्स एंड डिसटीब्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड है।  इस पूरी खरीद में घोटाले की आशंका जताई जा रही है। दरअसल, विश्वविद्यालयों में किताबों की खरीद के लिए किसी टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। दिल्ली स्थित एक कंपनी को ऑर्डर दिए गए और करोड़ों रुपए का भुगतान कर दिया गया। 

बता दें, बिहार के पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय का भवन अभी नहीं बना है। बावजूद इसके पांच करोड़ रुपये की किताबें और अलमीरा की खरीद की गई। इन किताबों को रखने की जगह नहीं थी। कई महीने तक किताबें एक ही कमरे में पड़ी रहीं। जब मामले का खुलासा हुआ तो आनन-फानन में आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में किताबों को रखने के लिए किराए पर एक फ्लोर लिया गया है। इसके लिए 50 लाख रुपए से अधिक का किराया साल में विश्वविद्यालय को देना होगा।

आश्चर्य की बात यह है कि इन किताबों का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। ऐसा इसलिए कि सिलेबस और समसामयिक मुद्दों के इतर किताबें खरीद ली गईं। साफ शब्दों में बताएं तो बहुत सारी किताबें ऐसी हैं जो सिलेबस के मुताबिक मेल नहीं खाती। इन किताबों को सिर्फ बुक्स अलमीरा की शोभा बढ़ाने के लिए खरीदा गया है। शिक्षकों और छात्रों की तरफ से आरोप लगाया जा रहा है कि पुस्तकों की खरीद में मानकों का पालन नहीं किया गया सिलेबस और करंट अफेयर्स से जुड़े किताबों की खरीद की गई होती तो यह उपयोग लायक होती। वहीं अब इस मामले की जांच विजिलेंस की टीम कर रही है। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने इस बात की पुष्टि की है कि किताबों की खरीद इंडिका पब्लिशर्स डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड से ही की गई है। 

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