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Patna Malahi Pakri: मेट्रो की जमीन खाली करवाने के क्रम में पुलिस ने की लाठीचार्ज, एक व्यक्ति की जान चली गई
हमलोग अपने बच्चे को लेकर भागे. सारा सामान था, बकरी थी, सब इधर-उधर हो गया. प्रशासन ने बहुत क्रूर व्यवहार किया है.
 

मलाही पकड़ी के पास मेट्रो की जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए मंगलवार की शाम जिला पुलिस वहां पहुंची। झोपड़पट्टी खाली करवाने के क्रम में पुलिसकर्मियों की ओर से लोगों पर लाठी चलाई गई। उन्हें दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया। इस घटना में करीब आधा दर्जन से अधिक लोग जख्मी हो गए हैं और आज बुधवार को एक व्यक्ति की जान चली गई। घटना से आक्रोशित लोगों ने मलाही पकड़ी को सभी ओर से जाम कर रखा है। जाम के कारण वहां से होकर गुजरने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इधर, मृतक के परिवार वाले शव को लेकर मलाही पकड़ी चौक पर बैठे हैं। उनकी एक ही मांग है कि उनके साथ न्याय किया जाए। 

दरअसल, स्मार्ट सिटी में मेट्रो बनाने के उद्देश्य से पटना के मलाही पकड़ी स्थित स्लम इलाके को खाली कराने के लिए बीते रोज जिला प्रशासन की टीम वहां पहुंची। इस दौरान झुग्गी-झोपड़ी में रह रहे लोगों और पुलिस की बीच झड़प हुई। कुछ लोगों ने रोड़ेबाजी शुरू कर दी। पुलिसकर्मियों ने लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, जिसके बाद लोग वहां से अपने बच्चों को लेकर भागे। इस क्रम कई लोग चोटिल हुए। पुलिस की लाठी खाकर कुछ के हाथ-पैर में चोट आई तो किसी का सिर फट गया। लोग अपनी जान बचा कर भागे। 

सुमन देवी ने कहा कि कल पुलिस 2 बजे के करीब आई और हमलोगों को घर खाली करने के लिए दो घंटे का समय दिया। हमलोग अपने बच्चों को लेकर भागे। सारा सामान था, बकरी थी, सब इधर-उधर हो गया। प्रशासन ने बहुत क्रूर व्यवहार किया है। वहीं पेशे से मजदूर नागेश्वर राम ने कहा कि हमलोग यहीं मलाही पकड़ी चौक पर रहते हैं। जगह खाली कराने के लिए पहले नोटिस दिया जाता है। हमलोगों को कोई नोटिस नहीं दिया गया। पुलिस दुबारा से आई और लोगों को पीट कर चली गई। इसमें हमारे एक पड़ोसी राजेश ठाकुर की जान चली गई। सरकार की ओर से अब तक कोई देखने तक नहीं आया है। 

पीड़ित परिवार
पीड़ित परिवार 

राजेश ठाकुर के भाई उदय ठाकुर ने कहा, "पुलिस ने लाठीचार्ज किया, उसी में मेरे भाई को सिर में चोट आई। रात में सोया तो सोया ही रहा गया। हमें सरकार से न्याय चाहिए। मेरा भाई मलाही पकड़ी चौक के पास चाय का ठेला लगाता था। उसके तीन बच्चे हैं। अब उसके घर का पालन-पोषण कौन करेगा? सरकार जब तक न्याय नहीं करती हम इस तरह ही सड़क पर बैठे रहेंगे।  " बता दें, राजेश ठाकुर की पत्नी का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है। वह बेसुध हो गई हैं। वहीं पास खड़े एक नौजवान ने हमसे बातचीत में कहा कि प्रशासन का यह रवैया बिल्कुल भी बर्दाश्त करने लायक नहीं है। पुरुषोतम कुमार ने कहा कि वह कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि झोपड़ी में महिलाएं भी रहती हैं लेकिन खाली करवाने के लिए आई पुलिस टीम में एक भी महिला पुलिस नहीं थी। स्मार्ट सिटी बनाने की राह में गरीबों के साथ प्रशासन का यह रैवया न्यायसंगत नहीं है।  

वहीं पुलिस का कहना है कि यह जमीन मेट्रो को दी गई है। जमीन पर अतिक्रमणकारियों ने झोपड़ी बना ली थी। हमने लोगों को समझा कर झोपड़ी खाली करवाना चाहा। लेकिन लोगों ने पथराव करना शुरू कर दिया। सुरक्षा की दृष्टि से हमारे ओर से बल प्रयोग किया गया। यहां आपको बता दें, स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए अतिरिक्त बल भी बुलाया गया। 

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