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शराबबंदी की समीक्षा बैठक से पहले तेजस्वी यादव ने CM से पूछा 15 सवाल
 


बिहार में शराबबंदी को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज समीक्षा बैठक कर रहे हैं। इस समीक्षा बैठक में राज्य में शराबबंदी के विफलता को लेकर चर्चा होगी। साथ ही रणनीति बनेगी कि किस तरह शराबबंदी को प्रभावी बनाया जाए। वहीं दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सीएम की समीक्षा बैठक से पहले उनसे 15 सवाल पूछे हैं। तेजस्वी यादव ने इन सवालों के जरिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा। तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री से सवाल किए। साथ ही कहा कि वह आशा करते हैं सीएम उनके प्रश्नों का जवाब देंगे या आज की समीक्षा बैठक में इन पर विमर्श करेंगे। वहीं उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री ऐसा नहीं करते हैं तो यह समीक्षा बैठक विशुद्ध नौटंकी होगी। तो आइए जानते हैं कि तेजस्वी यादव ने सीएम से क्या सवाल किए। 

तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री से पूछा कि वह आज कौन से नंबर की समीक्षा बैठक कर रहे हैं? क्या यह 1100वीं समीक्षा बैठक है? साथ ही उन्होंने पूछा कि बीते वर्षों में शराबबंदी को लेकर जो समीक्षा बैठक किए गए हैं उनका क्या परिणाम निकला। उन्होंने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि यदि इन समीक्षा बैठक के बाद भी वांछित परिणाम नहीं मिले तो यह प्रशासन की नहीं, सरासर मुख्यमंत्री की घोर विफलता है। कहा, "  मुख्यमंत्री शराबबंदी के नाम पर लाखों गरीबों-दलितों को जेल में डाल चुके हैं लेकिन वो बताएं कि अब तक उन्होंने शराब की पूर्ति करने वाले कितने माफिया, कारोबारी, तस्करों और अधिकारियों को जेल भिजवाया है? अगर नहीं तो क्यों? क्या यह कानून गरीब पर ही लागू होता है?" 

तेजस्वी यादव के कुछ अन्य सवाल इस तरह हैं- 

नीतीश सरकार शराब माफिया के साथ मिलीभगत के चलते न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करती जिससे एक-आध माफिया जो पकड़ाया जाता है उसे बरी होने में आसानी होती है। मुख्यमंत्री अगर शराबबंदी को लेकर गंभीर है तो वो बताएं शराबबंदी के कितने मामलों में हारने के बाद बिहार सरकार ने उच्चतम न्यायालय में अपील की है?

शराबबंदी के नाम पर आज तक कितने डीएसपी और एसपी स्तर के अधिकारी बर्खास्त हुए है? क्या शीर्ष पुलिस अधिकारी शराबबंदी के प्रति जवाबदेह नहीं है? 

शराबबंदी के नाम पर वह सिर्फ सिपाहियों को ही क्यों निलंबित करते है? निलंबित करने बाद उन्हीं 80% सिपाहियों को दुबारा बहाल क्यों करते है? अगर उन अधिकांश सिपाहियों की कोई गलती नहीं होती तो फिर आप उनके निलंबन का नाटक क्यों रचते है? क्या इसलिए कि शीर्ष अधिकारी बच जाएं और सिपाहियों को निलंबित कर कुछ समय तक मामला ठंडा कर दिया जाए?

शपथ लेने वाले अधिकांश पुलिसकर्मी और जदयू नेता शराब क्यों पीते है? सीएम अगर शराबबंदी की लेकर गंभीर है तो हमारे द्वारा सदन में साक्ष्य प्रस्तुत करने के बाद मंत्री रामसूरत राय और उनके भाई के खिलाफ कारवाई करने में आपके हाथ क्यों कांप गए? हम शराबबंदी में सहयोग करते है, साक्ष्य प्रस्तुत करते है तो आप कारवाई करने की बजाय सदन में बैठे-बैठे मास्क के अंदर मुस्कुराते है। आपके लिए शराबबंदी नहीं कुर्सी महत्वपूर्ण है।

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आपके राष्ट्रीय अध्यक्ष के करीबी, जदयू के वरिष्ठ नेतागण, सीतामढ़ी के उपाध्यक्ष, नालंदा के प्रखंड अध्यक्ष सहित श्याम बहादुर सिंह जैसे अनेक विधायकों और आपके करीबी नेताओं के हमने साक्ष्य और वीडियो आपके सामने रखे। जनता को प्रवचन देने से पूर्व आप यह बताए उनके विरुद्ध आपने क्या कारवाई की? कई ईमानदार अधिकारियों द्वारा आपके नेताओं के विरुद्ध कारवाई करने पर आपने उन अधिकारियों को ही हटा दिया। यही आपकी शराबबंदी को लेकर प्रतिबद्दता है।

तेजस्वी यादव ने आगे मुख्यमंत्री से कहा कि आप विपक्ष के किसी भी सकारात्मक फीडबैक, सुझाव और जमीनी हकीकत को हमेशा राजनीतिक चश्मे से देखते है इसलिए हर बात में आपको राजनीति ही नजर आती है। हमारी नहीं तो अहंकार त्याग कम से कम आपके वरिष्ठ सहयोगी और पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय जीतनराम मांझी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सहित अनेक सांसद जो इसकी खामियां गिनाते हैं, उन पर तो गौर कीजिए। तेजस्वी यादव ने आगे कहा, " वह शराब माफिया जिसकी वजह से अनेक मौतें हो जाती है वह आपके बेडरूम तक कैसे पहुंचता है? उसके चुनाव जीतने पर आपकी पूरी पार्टी उसे बधाई देने पहुंचती है? यह संबंध क्या कहलाता है?" 

विगत 15 दिनों में विभिन्न जिलों में जहरीली शराब से हुई 65 मौतों का दोषी कौन है? शराबबंदी के बावजूद प्रदेश की सीमा के अलावा 4-5 जिलों की सीमा पार कर करोड़ों लीटर शराब गंतव्य स्थल तक कैसे पहुंचती है? क्या आपके कथन अनुसार शासन-प्रशासन में सिवाय आपको छोड़ सब लोग ही गड़बड़ हैं? 

अगर बिहार में कथित लाखों लीटर शराब जब्त हुई है, तो वह प्रदेश के अंदर कब, कैसे और क्यों पहुंची? इसमें किसका दोष है? यह किसकी विफलता है? अगर सरकार में बैठे माफिया, तस्कर, सत्तारूढ़ नेता और अधिकारी बिहार में प्रति माह करोड़ों लीटर शराब की पूर्ति नहीं कराते तो क्या अदृश्य “सुशासनी भूत” यह सप्लाई करता-कराता है? तेजस्वी ने कहा- दिखावटी समीक्षा बैठक से पूर्व आपको गहन आत्म चिंतन, मनन और मंथन की जरूरत है। तब तक आप स्वयं की तथा खुलेमन से शासन- प्रशासन की गलतियां स्वीकार नहीं करेंगे तब तक यह बैठके एवं शराबबंदी अन्य दिनों की भांति सामान्य रूप से चलती रहेगी और इनका कोई अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आएगा।

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