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फांसी की सजा पाये तीन कैदियों के मामलों में झारखंड हाईकोर्ट ने सुनाया निर्णय, सात मामलों पर फैसला अब भी लंबित

फांसी की सजा पाये तीन कैदियों के मामलों में झारखंड हाईकोर्ट ने सुनाया निर्णय, सात मामलों पर फैसला अब भी लंबित

झारखंड हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले 10 में से तीन कैदियों के मामलों में फैसला सुना दिया है। हालांकि, शेष सात मामलों पर अदालत में सुनवाई अभी भी जारी है। इन दस दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर झारखंड हाईकोर्ट में लंबित फैसलों में शीघ्रता लाने की मांग की थी। इस याचिका की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया और हाईकोर्ट में लंबित मामलों की स्थिति पर जानकारी मांगी थी।

इसके बाद हाईकोर्ट ने अब तक तीन मामलों में फैसला दिया है। इनमें दो कैदी दुमका जिले में हुई एक नक्सली हमले के आरोपी हैं, जिसमें पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार समेत पांच पुलिसकर्मियों की जान गई थी। इस जघन्य अपराध में निचली अदालत ने सुखलाल मुर्मू और सनत बासकी को मौत की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति रंगोन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। न्यायमूर्ति रंगोन मुखोपाध्याय ने फांसी की सजा को रद्द कर दिया, जबकि न्यायमूर्ति संजय प्रसाद ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। इस प्रकार दोनों जजों की राय भिन्न रही।

तीसरे मामले में, गुमला जिले की एक दिल दहला देने वाली घटना में तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या करने के आरोपी बंधन उरांव को निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। इस मामले में न्यायमूर्ति रंगोन मुखोपाध्याय ने उसकी सजा को कम करते हुए फांसी को आजीवन कारावास में बदल दिया। यह अपराध वर्ष 2018 में हुआ था और तभी से आरोपी जेल में बंद है।